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तीसरी भारत-ऑस्ट्रेलिया साइबर वार्ता

सितम्बर 04, 2019

तीसरी भारत-ऑस्ट्रेलिया साइबर नीति वार्ता नई दिल्ली में 4 सितंबर 2019 को आयोजित की गई। विदेश मंत्रालय के ई-गवर्नेंस, सूचना प्रौद्योगिकी और साइबर डिप्लोमेसी में प्रभारी संयुक्त सचिव श्री उपेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में एनएससीएस, एमएचए, मिटवाई, डॉट, सीईआरटी-इन तथा एनसीआईआईपीसी के प्रतिनिधि शामिल थे। साइबर मामलों के राजदूत डॉ टोबियास फ़ेकिन के नेतृत्व वाले ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधिमंडल में विदेश मामलों और व्यापार विभाग मंत्रालय, गृह विभाग, ऑस्ट्रेलियाई सिग्नल निदेशालय के ऑस्ट्रेलियाई साइबर सुरक्षा केंद्र और ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस के प्रतिनिधि शामिल थे।

इस वार्ता ने वर्तमान और उभरते हुए साइबर सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया, जिसमें उभरती हुई आईसीटी प्रौद्योगिकियां, साइबर सुरक्षा नीति और कानून के प्रति राष्ट्रीय दृष्टिकोण तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे जिनमें संयुक्त राष्ट्र के सरकारस्तरीय विशेषज्ञों के समूह और ओपन एंडेड वर्किंग ग्रुप, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, और साइबर अपराध का मुकाबला करने के लिए सहयोग शामिल हैं।

दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा से जुड़ी वारदातों की बढ़ती संख्या और इसके गंभीर परिणामों के प्रति अपनी चिंता जाहिर की जिसमें संबंधित देशों की राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित करने और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को कमजोर करने की ताकत है। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने साइबर जगत में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई जिसमें अंतरराष्ट्रीय कानून को लागू करने के लिए 2013 और 2015 के यूएनजीजीई रिपोर्ट के कार्यान्वयन के प्रति साझा प्रतिबद्धता शामिल है, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र चार्टर, जिम्मेदार राज्य व्यवहार के मानदंड, विश्वास बहाली के उपाय और क्षमता निर्माण। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के सरकारस्तरीय विशेषज्ञ समूह तथा ओपन एंडेड वर्किंग ग्रुप सहित अन्य बहुपक्षीय मंचों पर इन मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत के लिए प्रतिबद्ध हैं।

साइबर सुरक्षा और प्रौद्योगिकी नीति के मुद्दों पर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता को देखते हुए, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने साइबर सुरक्षा नीति के विकास, दूरसंचार, विधायी विकास और निजी क्षेत्र के साथ संबंध के बारे में सूचनाओं को साझा करने के लिए व्यावहारिक साइबर सुरक्षा नीति सहयोग को विशेषज्ञों के पारस्परिक आदान-प्रदान के जरिये बढाने पर सहमति जताई।

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने देश के विशेषज्ञों का आदान-प्रदान शुरू करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने पहली बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की। इसके अलावा भारत और ऑस्ट्रेलिया साइबर सुरक्षा सहयोग पर एक संयुक्त कार्यदल की स्थापना की दिशा में काम करने और साइबर सहयोग पर एक फ्रेमवर्क समझौते के लिए बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए।

दोनों देशों ने माना कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) की बढ़ती सर्वव्यापकता स्मार्ट शहरों के विकास के जरिये हमारी संबंधित अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर और लाभ प्रदान करती है। इन अवसरों का लाभ उठा पाना पूरी तरह इनके डिज़ाइन की सुरक्षा पर निर्भर करता है। दोनों देश स्वीकार करते हैं कि वर्तमान में असुरक्षित आईओटी उपकरणों एवं उनके आकार तथा विश्व स्तर पर आईओटी उपकरणों के सुरक्षा मानकों द्वारा उत्पन्न साइबर सुरक्षा जोखिमों को दूर करने के लिए अधिक से अधिक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आईओटी सुरक्षा मानकों और सर्वोचित उपायों के बारे में जानकारी साझा करने और आईओटी विकास के मुख्य तत्व के रूप में डिजाइन द्वारा सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई।

वार्ता के दौरान राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण व सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के बढ़ते महत्व पर चर्चा की गयी। इसे देखते हुए, दोनों देश इन मुद्दों पर आगे बातचीत जारी रखने के लिए सहमत हुए और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों की साइबर सुरक्षा पर सहयोग के अवसरों की पहचान करने के लिए तत्पर रहे।

ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधिमंडल ने भारत को उनके आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और अगली वार्ता की मेजबानी करने के लिए तत्परता दिखाई।

नई दिल्ली
04 सितम्बर, 2019

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