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भारत के सर्वोत्कृष्ट क्षमता निर्माण कार्यक्रम की 55 वीं वर्षगांठ - भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी)

अक्तूबर 05, 2019

विदेश मंत्रालय का विकास भागीदारी प्रशासन प्रभाग 7 अक्टूबर, 2019 को भारत के सर्वोत्कृष्ट क्षमता निर्माण कार्यक्रम - भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटी ईसी) की 55 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए प्रवासी भारतीय केंद्र में एक सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। माननीय विदेश मंत्री इस आयोजन की अध्यक्षता करेंगे और रक्षा राज्य मंत्री और विदेश राज्य मंत्री सम्मानित अतिथि होंगे। इस कार्यक्रम में विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, आईटीईसी साझेदार विश्वविद्यालयों और संस्थानों के प्रमुख, मिशनों के प्रमुख और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भाग लेंगे।

आईटीईसी कार्यक्रम विदेश मंत्रालय द्वारा 15 सितंबर 1964 को शुरू किया गया था। पिछले 55 वर्षों में, आईटीईसी हमारे देश के प्रमुख संस्थानों में ग्लोबल साउथ के 160 भागीदार देशों के 200,000 से अधिक सरकारी अधिकारियों और पेशेवरों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के माध्यम से भारत की संवृद्धि और विकास के विशाल और अनूठे अनुभव को साझा करने के लिए एक वाहन है। हमारे निकटवर्ती और हमारे अफ्रीकी भागीदारों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ, आईटीईसी सूचना प्रौद्योगिकी, हेल्थकेयर, कृषि, शासन, उद्यमिता, ऊर्जा, संसदीय अध्ययन आदि सहित और विशेषज्ञता के व्यापक क्षेत्र में पेशेवरों को हर साल लगभग 12,000 छात्रवृत्ति प्रदान करता है। इसे और विस्तारित करने की मांग की जा रही है।

उपरोक्त संदर्भ में, ई-आईटीईसी और आईटीईसी एक्जीक्यूटिव जैसी नई क्षमता निर्माण पहलों को कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया जाएगा, जो उपयोगकर्ताओं और पेशेवरों के व्यापक क्रॉस-सेक्शन को पूरा करने के लिए अभिनव पाठ्यक्रमों की लोकप्रिय मांग को पूरा करेगा।

विदेश मंत्री अफ्रीकी देशों के लिए ई-विद्याभारती और ई-आरोग्यभारती (टेली-शिक्षा और टेली-मेडिसिन परियोजना) का भी उद्घाटन करेंगे। अफ्रीकी युवाओं के लाभ के लिए भारत की डिजिटल क्रांति का लाभ उठाने के लिए माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप, अफ्रीका के सभी 54 देशों के लिए यह एक पैन-अफ्रीकी पहल है।

मानव संसाधन विकास भारत के विकास सहयोग और विदेश नीति का एक प्रमुख घटक है। भारत का विकास सहयोग सशर्तताओं से मुक्त है और एकजुटता, बहुलता, स्वैच्छिक सहयोग और पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों में निहित है। आईटीईसी और अन्य क्षमता निर्माण की पहल भारत की इस धारणा को मूर्त रूप देती है कि विकास और विश्व की समृद्धि अविभाज्य है, और भारत अपनी विकासात्मक कहानी के दशकों में अर्जित अपने कौशल और तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करके अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

नई दिल्ली
अक्टूबर 05, 2019

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