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भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर स्मारक डाक टिकट जारी करने के दौरान विदेश सचिव का संबोधन

जून 10, 2021

प्रिय अतिथिगण और दोस्तों,

1. भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर संयुक्त स्मारक डाक टिकट को जारी करते हुए मुझे बेहद प्रसन्नता हो रही है। मैं जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे. लिंडनर और भारत सरकार के डाक विभाग के सचिव श्री विनीत पांडे जी को इस मौके पर हमारे साथ जुड़ने के लिए धन्यवाद देता हूं।

2. भारत ने 7 मार्च 1951 को जर्मनी के संघीय गणराज्य के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने की घोषणा की थी, और वह ऐसा करने वाले पहले देशों में से था। इसके बाद दोनों देशों ने साथ मिलकर काफी प्रगति की है। आज, हमारे संबंध घनिष्ठ राजनीतिक एवं आर्थिक संबंधों तथा लोगों से लोगों के बीच मजबूत जुड़ाव पर आधारित हैं।

3. इन घनिष्ठ संबंधों की झलक कोविड-19 महामारी से निपटने में वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों व उपकरणों की आपूर्ति में दोनों देशों के बीच के सहयोग में देखी जा सकती है। इस संकट के शुरुआती दिनों में, भारत ने जर्मनी को हाइड्रोक्सीकोरोक्विन और अन्य फार्मास्युटिकल उत्पादों की आपूर्ति की, जिनकी उस वक्त जरुरत थी। इसके पश्चात्, और भारत में जब महामारी की दूसरी लहर आई, तब जर्मनी ने भारत को स्वास्थ्य संबंधी उपकरणों और जरुरी दवाएं तथा कच्चे माल की आपूर्ति करते हुए सहायता प्रदान की। मैं इस मौके पर जर्मनी की सरकार और यहां लोगों को इस मदद हेतु धन्यवाद देना चाहता हूं।

4. दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों को दर्शाते हुए, भारत और जर्मनी ने पहले भी एक-दूसरे के सम्मान में हेतु कई डाक टिकट जारी किए हैं। इन डाक टिकटों के जरिए हमारी संस्कृति, शख्सियत और इतिहास को दर्शाया है। 1969 में जारी किए गए जर्मनी के डाक टिकटों के जरिए महात्मा गांधी को सम्मानित किया गया; और 1979 में इनमें भारतीय लघु चित्रों को प्रदर्शित किया गया। इसी तरह, भारतीय डाक टिकटों के जरिए 1970 में बीथोवेन को सम्मानित किया गया; साल 1974 में मैक्स मुलर; 1979 में अल्बर्ट आइंस्टीन; और 1982 में रॉबर्ट कोच को सम्मानित किया गया।

5. मार्च, 2021 में, माननीय विदेश मंत्री ने हमारे संबंधों की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक लोगो जारी किया था। डाक टिकट जारी करने के अलावा, बर्लिन स्थित हमारे दूतावास और नई दिल्ली स्थित जर्मनी के दूतावास ने कई अन्य कार्यक्रमों के आयोजन की भी योजना बनाई है।

6. वर्ष 2000 में स्थापित भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी बढ़ते व्यापार और निवेश संबंधों की वजह से सुदृढ़ है। विज्ञान एवं तकनीकी अनुसंधान और उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग से भारत और जर्मनी के बीच छात्रों और पेशेवरों का आदान-प्रदान बढ़ा है।

7. जर्मनी यूरोपीय संघ में हमारे सबसे करीबी दोस्तों में से एक रहा है। भारत-यूरोपीय संघ के बीच व्यापार एवं निवेश समझौते पर वार्ता की शुरुआत होना हमारे आर्थिक संबंधों के लिए अच्छा संकेत है।

8. उच्च राजनीतिक स्तरों पर हमारे नियमित संस्थागत जुड़ाव से हमारे द्विपक्षीय संबंधों को दिशा और गति दोनों मिली है। विगत 7 सालों में हमारे प्रधानमंत्री और चांसलर एंजेला मर्केल ने 12 बार मुलाकात की हैं। इस साल जनवरी में आयोजित हुए आभासी शिखर सम्मेलन के दौरान, उन्हें हमारे द्विपक्षीय, क्षेत्रीय व वैश्विक हितों से जुड़े क्षेत्रों की उच्च स्तरीय समीक्षा का अवसर मिला।

9. भारत और जर्मनी बहुपक्षीय तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में एक-दुसरे के घनिष्ट सहयोगी हैं। हम आतंकवाद का मुकाबला करने, साइबर सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी साथ मिलकर काम करते हैं।

10. पिछले साल, जर्मनी इंडो-पैसिफिक के लिए दिशानिर्देश जारी करने वाला दूसरा यूरोपीय देश रहा, जिसका हम स्वागत करते हैं। हम स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के अपने अभिसरण दृष्टिकोण पर जर्मनी के साथ मिलकर काम करने को लेकर तत्पर हैं।

11. महामारी के बाद की विश्व व्यवस्था में सभी देश बहुपक्षवाद के सिद्धांत और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का सम्मान करें, यह सुनिश्चित करने हेतु समान विचारधारा वाले देशों को ठोस प्रयास करने होंगे। इसलिए भारत और जर्मनी को अपने सामरिक जुड़ाव को और बढ़ाना चाहिए। हम विशेष क्षमता वाले देश हैं, जो साथ मिलकर दुनिया की भलाई करने वाली एक ताकत बन सकते हैं।

12. राजनयिक संबंधों के 70वर्ष पूरे होने की इस उपलब्धि हेतु दोनों देशों के नागरिकों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं। आज इस मौके पर संयुक्त स्मारक डाक टिकट का विमोचन करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है।

धन्यवाद।
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