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विदेश राज्य मंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी का स्विटज़रलैंड के बर्न में वित्त प्रभाव सम्मेलन 2021 ( सितंबर 28, 2021) में संबोधन

सितम्बर 29, 2021

देवियों और सज्जनों ,

नीयू ज़ुर्चर ज़ितुंग -एनजेडजेड द्वारा आयोजित वित्त प्रभाव सम्मेलन के उद्घाटन मौके पर भाग लेना मेरे लिए सम्मान की बात है। मुझे इस सम्मेलन में आमंत्रित करने के लिए मैं नीयू न्यू ज़ुर्चर ज़ितुंग टीम को धन्यवाद देना चाहती हूं। बहुत कम संस्थान ऐसे हैं जो200 से अधिक वर्षों तक बने रहते हैं। एनजेडजेड के प्रकाशकों और संपादकों की कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता 240 वर्ष से अधिक पुराने इस संस्थान के बारे में अपने आप में बहुत कुछ कहती है।

स्थिरता और जलवायु परिवर्तन का विषय, जिस पर इस सम्मेलन में विचार-विमर्श होना है, पूरी दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। इस साल अप्रैल में जलवायु पर नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि जलवायु परिवर्तन दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए एक जीती जागती वास्तविकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण जीवन और आजीविका पहले से ही प्रतिकूल प्रभावों का सामना कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस कार्रवाई की जरूरत है, हमें इस तरह की कार्रवाई को तेज गति से, बड़े पैमाने पर और वैश्विक समर्थन के साथ करना चाहिए।

पांच साल पहले, वैश्विक नेताओं ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करके वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने का संकल्प लिया था। हमें कुछ मूलभूत सहमत सिद्धांतों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित तरीके से जलवायु कार्रवाई करने की आवश्यकता है, जिनमें से सबसे प्रमुख "सामान्य लेकिन अलग अलग तरह की जिम्मेदारी और संबंधित क्षमताएं" हैं।

दुनिया में सबसे कम प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन करने के बावजूद भारत में हम इस दिशा में अपना काम जारी रखने के लिए सहमत हुए और यह प्रतिबद्धता दर्शायी कि हम अपने सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में कार्बन तीव्रता को 33-35 प्रतिशत तक कम कर देंगे; हमारी बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी को कम से कम 40 प्रतिशत तक बढ़ाएंगे और 2030 तक 2.5 से 3 अरब टन CO2 के बराबर का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाएंगे। इस प्रतिबद्धता का सम्मान करने के लिए, हमने ऊर्जा की बचत करने वाले 1.2 अरब एलईडी लैंपों और 32 लाख एलईडी स्ट्रीटलाइटों की आपूर्ति की है। हम भारत को दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने के अभियान में भी लगे हुए हैं। भारत उन शीर्ष 5 देशों में शामिल है, जहां ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे बनाए रखने के लक्ष्य की दिशा में काम किया जा रहा है। हम जलवायु परिवर्तन से संबंधित अपनी प्रतिबद्धताओं पर वायदे के मुताबिक काम कर रहे हैं।

अपनी विकास चुनौतियों के बावजूद, हमने स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, वनीकरण और जैव-विविधता पर कई साहसिक कदम उठाए हैं। भारत का ध्यान ऊर्जा की खपत में कटौती और उत्पादित ऊर्जा के कुशल प्रबंधन पर भी है। हमने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन जैसी वैश्विक पहलों को भी प्रोत्साहित किया है। 80 देश अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल हो गए हैं, जिससे यह कहीं भी सबसे तेजी से बढ़ते अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक बन गया है।

मित्रों

जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए एक एकीकृत, व्यापक और समग्र दृष्टिकोण अपनाने जरूरत है। इसके लिए नवाचार और नई और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों को व्यवहार में लाने की आवश्यकता है। इन अनिवार्यताओं से अवगत भारत ने अपने राष्ट्रीय विकास और औद्योगिक रणनीतियों में जलवायु संरक्षण को एकीकृत किया है।

ऊर्जा, जलवायु से संबधित सभी रणनीतियों के केंद्र में है। हमारा मानना है कि कार्बन उत्सर्जन करने वाले स्रोतों से अक्षय और गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की ओर जाने के संक्रमण काल में भारत नेतृत्व की भूमिका में है और स्वच्छ ऊर्जा के मामले में अग्रणी बन गया है। 'नए भारत' के लिए एक स्वच्छ ऊर्जा वाले भविष्य की सोच के साथ भारत सरकार ने 2022 के अंत तक अक्षय ऊर्जा के लिए 175 गीगावाट स्थापित क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें पवन ऊर्जा से 60 गीगावॉट और सौर ऊर्जा से 100 गीगावाट शामिल है। आज के समय में हमने अपनी बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर दिया है। हम 2022 तक अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी और बढ़ाकर इसे 45 प्रतिशत तक करने की योजना बना रहे हैं​ जिसका मतलब है कि हम अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की योजना बना रहे हैं। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों के आधार पर हमने अपने मूल लक्ष्य को दोगुना करने और 2030 तक 450 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए खुद को आगे बढ़ाया है।

हम देश की अक्षय ऊर्जा क्षमता का और अधिक दोहन करने का इरादा रखते हैं। हमारी अक्षय ऊर्जा क्षमता दुनिया में चौथी सबसे बड़ी है और इसका मौजूदा क्षमता विस्तार दुनिया में सबसे बड़ा है। पूंजी अब तेल आधारित ऊर्जा मॉडल से गहन नवीकरणीय ऊर्जा मॉडल की ओर बढ़ रही है और भारत की अर्थव्यवस्था के स्तर के साथ इसने सौर ऊर्जा क्षेत्र में उत्पादन की लागत को कम किया है। यह अंततः पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद होगा।

ऊर्जा पर ध्यान देने के अलावा, भारत ने विभिन्न अन्य क्षेत्रों में भी अपने विकास लक्ष्यों में सततता को केन्द्र में रखा है। "जल जीवन मिशन", जिसका उद्देश्य 2024 तक व्यक्तिगत घरेलू कनेक्शन के माध्यम से ग्रामीण भारत के सभी घरों में सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है के लिए पूरी मजबूती के साथ सततता बनाए रखने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। पिछले एक दशक में भारत उन शीर्ष 3 देशों में शामिल रहा है, जिन्होंने पिछले दशक में वानिकी के क्षेत्र में काफी सफलता अर्जित की है। देश में वनाआच्छादित क्षेत्र का दायरा भौगोलिक क्षेत्र के लगभग एक चौथाई तक पहुंच चुका है। इससे पता चलता है कि वन क्षेत्रों को कम किए बिना भी विकास और प्रगति हासिल की जा सकती है। सतत विकास प्राप्त करने के हमारे प्रयासों से शेरों, बाघों, तेंदुओं आदि जैसे जानवरों की आबादी बढ़ाने में भी सफलता मिली है। भारत अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे जैसे कि जन परिवहन प्रणाली, हरित राजमार्ग और जलमार्ग का निर्माण कर रहा है। एक राष्ट्रीय योजना ई-गतिशीलता के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रही है।

जैसा कि हम इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और संपोषणीयता पर चर्चा कर रहे हैं, यह महसूस करना महत्वपूर्ण है कि जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए जलवायु न्याय महत्वपूर्ण है। सबके लिए समान पहुंच के अवसरों के बिना सतत विकास अधूरा है। हम सभी को अपने ग्रह के दीर्घकालिक भविष्य के बारे में सोचने की जरूरत है। पर्यावरण में बदलावा और प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव से गरीब लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि विकासशील देशों की प्रगति ऐसी हो जिससे गरीबी कम हो सके। यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ हमारी सामूहिक लड़ाई के हित में है।

ऐसे में जब हम सभी अपने ग्रह को हरा-भरा बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, आइए हम अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं को दूसरों के साथ साझा करें। आइए हम सभी अक्षय ऊर्जा, पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियों और अन्य में नवाचार के प्रयासों का भी समर्थन करें। जब हर देश पर्यावरण को पूरी दुनिया की भलाई के साथ जोड़कर देखेगा तभी सतत विकास एक वास्तविकता बन पाएगा।

मित्रों,

जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रक्रिया में आगे बढ़ते हुए हमें इस समस्या के प्रति जागरूकता को कार्रवाई में बदलना होगा। इसलिए व्यक्तिगत रूप से और सहयोग के माध्यम से यह जिम्मेदारी निभाने का काम सरकार, व्यापार और नागरिक समाज की इस पीढ़ी पर निर्भर करता है। कार्बन मुक्त जीवन शैली के लिए परिवर्तन को आसान बनाने के लिए हम में से प्रत्येक को अधिक जलवायु-अनुकूल विकल्प अपनाना होगा है। लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण, शायद, उपभोक्ताओं, मतदाताओं, नेताओं और कार्यकर्ताओं के रूप में हमारी भूमिका होगी।

महात्मा गांधी ने एक बार कहा था कि " पृथ्वी, सभी व्यक्तियों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त है किन्तु उनके लालच की पूर्ति के लिये नही।” आइए हम अपनी जरूरतों के लिए कम कार्बन वाले विकास पथ को अपनाकर अधिक जलवायु-अनुकूल जीवन शैली को आत्मसात करें, न कि लालच के लिए इन संसाधनों का दोहन करें। आइए हम जलवायु परिवर्तन को एक खतरे की घंटी के रूप में देखें और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरी भरी, स्वच्छ और एक संपोषणीय दुनिया छोड़ कर जाने के लिए न्यायसंगत और समावेशी समाधान तलाशें।

एक प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्था के रूप में, भारत सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए तैयार है। हमारा मानव केंद्रित दृष्टिकोण सतत विकास के हमारे विचार के मूल में है।

यह सम्मेलन सतत विकास पर काम कर रहे कुछ बेहतरीन विचारों को एक साथ लाता है। मैं इन विचार-विमर्शों में कुछ नए विचारों को साथ लाए जाने की आशा करती हूं।

आप सभी का धन्यवाद!

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