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कोलंबो के टेम्पल ट्रीज में भारतीय विकास सहयोग परियोजनाओं के उद्घाटन के अवसर पर विदेश सचिव की टिप्पणी

अक्तूबर 04, 2021

श्रम मंत्री, निमल सिरिपाला डी सिल्वा
शिक्षा मंत्री, दिनेश गुणवर्धने
विदेश मंत्री, प्रो जीएल पेइरिस
मत्स्यपालन मंत्री, डगलस देवानंद
वन्यजीव एवं वन संरक्षण मंत्री, सीबी रथनायके
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. केहेलिया रामबुकवेल्ला
कृषि मंत्री, महिंदानंद अलुथगामगे
वृक्षारोपण मंत्री, डॉ रमेश पथिराना
ग्रामीण आवास एवं निर्माण तथा भवन निर्माण सामग्री उद्योग राज्य मंत्री, इंडिका अनुराधा हेराथ
संपदा आवास एवं सामुदायिक अवसंरचना राज्य मंत्री, जीवन थोडामन
श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त, श्री गोपाल बागले
श्रीलंकाई और भारतीय प्रतिनिधिमंडलों के मेरे सहयोगी

देवियों एवं सज्जनों


श्रीलंका में भारतीय विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए आज के समारोह में भाग लेकर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं। कुछ समय पहले ही, मेरी महामहिम प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के साथ एक बहुत ही फलदायी बैठक हुई थी। वे भारत के एक उत्साही मित्र और भारत-श्रीलंका संबंधों को गहन बनाने के लिए समर्थन के एक दृढ़ स्रोत हैं। मैं महामहिम राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे से मिलने के लिए उत्सुक हूं, जिनकी भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय संबंधों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता सर्वविदित है।

महानुभावों, सहकर्मियों और मित्रों,


यह वर्तमान पद पर रहते हुए श्रीलंका की मेरी पहली यात्रा है लेकिन मुझे अतीत में कई अवसरों पर श्रीलंका जाने का सौभाग्य मिला है। इन सभी वर्षों के दौरान, मैं हमारे संबंधों में आए व्यापक परिवर्तनों का साक्षी रहा हूं।

कल, मुझे पवित्र दालदा मालिगावा मंदिर के दर्शन के लिए कैंडी जाने का सौभाग्य मिला। मैंने त्रिंकोमाली और जाफना का भी दौरा किया जहां मैंने जाफना सांस्कृतिक केंद्र को देखा, जो भारतीय अनुदान सहायता से निर्मित एक प्रतिष्ठित परियोजना है।

ये स्थान दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत और हमारी मजबूत विकास साझेदारी को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। हमने हाल के वर्षों में कई जन-केंद्रित परियोजनाओं की सफलता को देखा है।

मुझे विभिन्न क्षेत्रों में हमारे द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति को देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उच्चस्तरीय यात्राओं, विशेष रूप से, राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे की क्रमशः नवंबर 2019 और फरवरी 2020 में भारत की राजकीय यात्राओं ने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति दी है। सितंबर 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के बीच वर्चुअल द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था क्योंकि इसने रक्षा एवं सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, व्यापार और वाणिज्य तथा लोगों से लोगों के संबंध जैसे क्षेत्रों में हमारे सहयोग के भविष्य के विकास का खाका तैयार किया।

पिछले एक साल में, भारत ने विस्तृत हिंद महासागर क्षेत्र में एचएडीआर की स्थितियों में एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता और प्रथम उत्तरदाता होने की अपनी साख को दृढ़ता से मजबूत किया है।

भारत को ख़ुशी थी कि इसने समुद्री प्रदूषण और आग लगने की हाल की घटनाओं में श्रीलंका के अनुरोधों का तुरंत उत्तर दिया। भारतीय नौसेना ने यहाँ की कोविड स्थिति से निपटने के लिए अगस्त में श्रीलंका को मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन की तेजी से डिलीवरी के लिए अपनी क्षमता का भी इस्तेमाल किया।

कोविड महामारी के दौरान, भारत ने श्रीलंका की विशिष्ट और तत्काल चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए यात्रा के लिए अपने हवाई क्षेत्र को खुला रखा।

श्रीलंका में स्थिति को आसान बनाने के साथ-साथ, हमारे लिए कनेक्टिविटी पहल पर काम करना भी उपयुक्त हो सकता है, जैसे कि जाफना से चेन्नई की उड़ान, कराईकल और कांकेसंथुराई तथा धनुषकोडी और तलाईमनार के बीच नौका सेवाएँ और कुशीनगर में नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ बौद्ध गलियारे जैसी परियोजनाएं।

मित्रों,

यह याद किया जा सकता है कि 2009 के तत्काल बाद ही, भारत ने श्रीलंका में अपनी आवास परियोजना शुरू कर दी थी। समय के साथ, यह परियोजना हमारी विकास सहयोग साझेदारी का एक अभिन्न अंग बन गई है।

आज हम भारतीय आवास परियोजना के तीसरे चरण में 1235 घर समर्पित कर रहे हैं, जो इस पूरे पहाड़ी देश में फैले हैं।

अन्य परियोजनाएं, जैसे कि वावुनिया जिले में मॉडल हाउसिंग विलेज, जाफना में वडामराडची में स्कूल भवन और पुसेलवा में सरस्वती सेंट्रल कॉलेज की इमारत भी हमारे विकास सहयोग के जन केंद्रित लाभों को दर्शाती हैं। मैं इस बात पर भी प्रकाश डालना चाहूंगा कि ये परियोजनाएं स्थानीय कंपनियों को रोजगार देती हैं और अपने कार्य में श्रीलंकाई सामग्री और श्रम का उपयोग करती हैं।

मुझे उम्मीद है कि आने वाले महीनों में, दोनों पक्ष कुछ शेष परियोजनाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे जैसे कि दांबुला कोल्ड स्टोरेज प्लांट, पोलोन्नारुवा में त्रिभाषी स्कूल और पल्लेकले में कंद्यन् डांसिंग स्कूल, जिनकी प्रगति कोविड-19 के कारण लगाए गए प्रतिबंधों और उसके बाद की प्रशासनिक चुनौतियों के कारण बाधित हो गयी थी।

भारत सरकार श्रीलंका में रामायण सर्किट से जुड़े स्थलों पर पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं के विकास का भी समर्थन करेगी।

इस अवसर पर मैं यह बताना चाहता हूं कि अपनी ओर से, हम अपने सामाजिक-आर्थिक संबंधों पर कोविड-19 प्रतिबंधों के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और कोविड के बाद उबरने के प्रयासों में श्रीलंका सरकार के साथ खड़े रहेंगे।

महानुभावों, देवियों एवं सज्जनों,

भारत और श्रीलंका दोनों ने विनाशकारी कोविड महामारी से अपनी अर्थव्यवस्थाओं में बड़े व्यवधान देखे हैं। जैसा कि हम अपने संबंधित देशों के लिए तेजी से सामाजिक-आर्थिक सुधार चाहते हैं, हमारी आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने और पारस्परिक लाभ, आपसी समझ और अच्छे पड़ोसी संबंधों द्वारा परिभाषित साझा उद्देश्य के सिद्धांतों पर स्थापित हमारे समयसिद्ध द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है।

मुझे विश्वास है कि इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री महामहिम जी.एल. पेइरिस, वित्त मंत्री महामहिम बासिल राजपक्षे और मेरे समकक्ष विदेश सचिव एडम. कोलम्बेज के साथ मेरे गहन विमर्श, साझा आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों का संयुक्त रूप से सामना करने में योगदान देंगे और आगे एक नया सहयोगी रास्ता तैयार करेंगे।

मैं आप सभी का धन्यवाद करता हूं।
अयूबोवन, वणक्कम।

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