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भारत आसियान व्यापार शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विदेश मंत्री का मंतव्य (अक्टूबर 07, 2021)

अक्तूबर 07, 2021

महामहिम,
विशिष्ट अतिथिगण,
देवियों और सज्जनों


आसियान–भारत व्यापार शिखर सम्मेलन 2021 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करना बहुत गर्व की बात है। यह सम्मेलन विदेश मंत्रालय और सीआईआई के बीच साझेदारी का परिणाम है। सरकार, व्यापार मंडलों, उद्यमों और थिंक टैंक्स (विचारक समूहों) जैसे अलग– अलग क्षेत्रों से प्रतिभागियों को एक साथ लाने पर, मैं, आयोजकों की सराहना करता हूँ। हमारी सामूहिक अपेक्षा यह है कि यह सम्मेलन आसियान– भारत व्यापार संबंधों की चुनौतियों और अवसरों पर विचार– विमर्श करे।

आसियान के साथ भारत के संबंध इतिहास, भूगोल और संस्कृति से जुड़े हैं। हाल के वर्षों में जिस बात ने उनमें जोश भरा है वह है, आपसी हितों और विकास के लिए वर्तमान क्षमता के बारे में बढ़ती जागरूकता। बीते 25 वर्षों के दौरान जैसे– जैसे हमारे बीच सहयोग बढ़ा, वैसे– वैसे सहयोग के लिए नए– नए आयाम और क्षेत्र सामने आए। बाद के परिवर्धनों में कनेक्टिविटी और सुरक्षा अधिक उल्लेखनीय है। परिणामस्वरूप, हमारी लुक ईस्ट पॉलिसी परिपक्व हो कर एक्ट ईस्ट बन गई। इसकी सफलता हिन्द– प्रशांत क्षेत्र में भारत के बढ़ते कद में साफ नज़र आती है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि आसियान भारत के वैश्विक आर्थिक वचनबद्धता के प्रमुख केंद्रों में से एक है। जैसे– जैसे यह विकसित होगा, स्वाभाविक है कि हम महत्वाकांक्षा के उस स्तर पर फिर से जाना चाहेंगे जिसे हमने अपनी साझेदारी के लिए निर्धारित किया है। क्षेत्र में होने वाले स्वायत्त परिवर्तनों से भी यह प्रभावित है। लेकिन जिस चीज़ ने इस उद्देश्य को एक नई तात्कालिकता प्रदान की है, वह है कोविड -19 महामारी के मद्देनज़र हमारे सहयोग की पुनर्कल्पना करने की आवश्यकता।

अधिकांश देश अपनी आर्थिक नीतियों और वैश्विक दृष्टिकोण दोनों को कैसे देखते हैं, स्पष्ट रूप से इसकी पृष्ठभूमि महामारी तैयार करती है। आखिराकार, इसने हमारी आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है, हमारे विनिर्माण को प्रभावित किया है, हमारे व्यापार को नुकसान पहुँचाया है और सेवा के कई क्षेत्रों को वास्तव में बर्बाद कर दिया है। इन घटनाओं ने न केवल हमारे दैनिक कारोबार के विभिन्न आयामों को बदल दिया है बल्कि इन्होंने हमारे जीवन जीने के तरीकों को भी आकार दिया है। बीते दो वर्षों से चले आ रहे संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार सहयोग के लिए चार क्षेत्रों ने अपनी तरफ बहुत अधिक ध्यान आकर्षित किया है: (i) लचीला और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला, (ii) स्वास्थ्य सुरक्षा, (iii) विकास हेतु डिजिटल और (iv) हरित एवं संवहनीय पुनर्प्राप्ति। इन्हें हमारे मुख्य एजेंडा में होना चाहिए।

वर्ष 2020 की शुरुआत से हम सभी ने जिन अनिश्चितताओं का अनुभव किया है, उन्हें एकदम से दूर नहीं किया जा सकता। न ही हम उन्हें एक बार घटने वाली घटना ही मान सकते हैं। इसलिए तो, भले ही हम भविष्य की योजना बनाने को विवश हों, हमें तत्काल प्रतिक्रिया देने का काम भी सौंपा गया है। उत्तरों का एक बड़ा हिस्सा– दोनों ही अल्पकालिक और परे– विविधीकरण, विस्तार और पारदर्शिता में निहित हैं। हमारी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थों को संकट–मुक्त करना तभी संभव होगा जब हम उस संबंध में शीघ्रता से सफलता का एक ठोस उपाय प्राप्त कर लेंगे।

कोविड-19, वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली की कई खामियों को सामने लेकर आया। सार्थक साझेदारी, उन्नत तकनीकों को साझा करना, वैक्सीन और फार्मास्यूटिकल उत्पादन में सहयोग, स्वास्थ्य सूचना के क्षेत्र में क्षमता निर्माण और पारदर्शिता उत्तरों का ही हिस्सा है। और इन सब में, व्यवसायों की भूमिका महत्वपूर्ण है। संकट अक्सर रचनात्मकता का आधार हो सकता है और हमारा प्रयास इसमें से मजबूती से बाहर आने का होना चाहिए।

कोविड चुनौती को ही ले लीजिए। भारत कोविड–19 के लिए दुनिया का सबसे पहला डीएनए– वैक्सीन बनाने में सफल रहा, एक और एमआरएनए (mRNA) वैक्सीन अपने अंतिम चरण में हैं, साथ ही नाक के जरिए दिया जाने वाला टीका भी अंतिम चरण में है। हमारे वैश्विक सहयोग ने हमें दुनिया के प्रमुख वैक्सीन उत्पादन केंद्र के रूप में उभरने में सक्षम बनाया है। वास्तव में, हमने सहयोग के नवीन तरीकों को भी देखा है, इसमें क्वाड राष्ट्रों द्वारा सहमत एक पहल भी शामिल है। इससे हिन्द– प्रशांत के देशों को महत्वपूर्ण लाभ हो सकता है। वैक्सीन के अलावा, भारतीय फार्मास्युटिकल विनिर्माण उद्योग ने अधिक मांग वाली दवाओं के उत्पादन में तेजी लाकर चुनौती को स्वीकार किया है। यह सब तब भी हो रहा था जब हमने भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को साथ–साथ बदला था। वास्तव में स्वास्थ्य क्षेत्र सभी समाजों के लिए अधिक गंभीर प्राथमिकता वाला क्षेत्र बन कर उभरा है। उद्योगों को आने वाले अवसरों को पहचानना चाहिए।

कोविड युग की मजबूरियों ने हम सभी को और अधिक डिजिटल बना दिया है। आसियान और बड़े हिन्द– प्रशांत क्षेत्र, दोनों ही में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना, इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। उसके नमूने वर्तमान विकास साझेदारियों को शासित करने वाली व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं। अपनी तरफ से, भारत इस क्षेत्र की मदद के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी– आधारित नव–आविष्कारों को प्रस्तुत कर सकता है क्योंकि हमारे समाधानों का पैमाना और लागत वास्तव में बहुत आकर्षक है।

कोविड-19 ने वैश्विक मूल्य श्रृंखला के विविधीकरण को, जो पहले से ही प्रगति पर था, एक अतिरिक्त गति प्रदान कर दिया है। आत्मनिर्भर भारत के लिए भारत का अभियान वैश्विक औद्योगिक लचीलेपन के लिए एक लोकतांत्रिक और विश्वसनीय भागीदार बनने की हमारी सोच के अनुरूप है। साथ ही, हमें हरित आर्थिक सुधार सुनिश्चत कर बेहतर निर्माण का पूरा लाभ उठाने की जरूरत है। इस विषय को हम जो महत्व देते हैं, वह इस बात में भी परिलक्षित होता है कि यह इस वर्ष के ईएएस नेताओं के वक्तव्य में से एक का विषय है, जिसे हमारे द्वारा सह–प्रायोजित किया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में काम करने के मामले में भारत का रिकॉर्ड बहुत अच्छा है और अक्षय ऊर्जा एवं हरित हाइड्रोजन समेत यह महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण रखता है। सतत विकास पर अधिक निकटता से सहयोग करना भी इंडो– पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (आईपीओआई) और आसियान आउटलुक ऑन इंडो– पैसिफिक (एओआईपी) पर हमारे सहयोग के केंद्र में है।

अन्यथा भी, हमारे बड़े क्षेत्र में महत्वपूर्ण सामाजिक– आर्थिक परिवर्तन चल रहे थे। कोविड महामारी ने उन्हें स्पष्ट रूप से तेज़ कर दिया है। यह महत्वपूर्ण है कि हम– भारत, आसियान और हमारे संबंध– हम इस बात को स्वीकार करें कि एक अलग ही दुनिया हमारा इंतज़ार कर रही है। यह ऐसा है जिसने विश्वास और पारदर्शिता, लचीलेपन और विश्वसनीयता के साथ– साथ विकल्पों और अतिरेक पर भी जोर दिया है। हमारी समकालीन बातचीत तभी प्रासंगिक होगी जब हम इन उभरती चिंताओं का उचित समाधान निकाल पाएंगे। हिंद– प्रशांत में आसियान की केंद्रीयता और भारत– आसियान संबंधों का महत्व स्वतः–स्पष्ट है। लेकिन अगर उन्हें प्रधान बने रहना है तो हमें उन विचारों और अवधारणाओं से अलग होने का प्रयास करना चाहिए जिनकी उपयुक्तता अब समाप्त हो चुकी है।

अपनी ओर से, भारत का आर्थिक सुधार विनिर्माण, श्रम, कृषि, शिक्षा, कौशल और निश्चित रूप से व्यापार करने में सहूलियत समेत विभिन्न क्षेत्रों में सुधार से प्रेरित है। हम विकास का अधिक प्रभावी इंजन एवं एक विश्वसनीय और लचीली आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने की इच्छा रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग, विशेष रूप से व्यवसायों के बीच, उस बेहतर विश्व की कुंजी होगी जिसकी तलाश हम सभी कर रहे हैं। इसके लिए निश्चित रूप से भारत और आसियान मिल कर काम कर सकते हैं।

आप सभी का धन्यवाद।

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