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गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) की 60 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित उच्च स्तरीय स्मरणीय बैठक में विदेश राज्य मंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी का वक्तव्य

अक्तूबर 11, 2021

विशिष्ट अतिथिगण, देवियों और सज्जनों,

भारत के कुछ सबसे पुराने मित्र देशों के साथ बेलग्रेड में यहां आकर खुशी हो रही है। हमारे आंदोलन के संस्थापक सदस्यों में से एक के रूप में, भारत के लिए यह स्मारक समारोह और भी अधिक विशिष्ट है। जैसा कि मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की विशेष दूत के रूप में आज अपना वक्तव्य दे रही हूं।

2. सबसे पहले, मैं इस आयोजन की उत्कृष्ट व्यवस्था के लिए अपने मेजबानों, एनएएम अध्यक्ष, अज़रबैजान के महामहिम अलीयेव और सर्बिया के राष्ट्रपति महामहिम एलेक्ज़ेंडर वुज़िक का धन्यवाद देती हूँ । मेरे प्रिय सहयोगी सर्बिया के विदेश मंत्री निकोला सेलाकोविक कुछ सप्ताह पहले भारत में हमारे साथ थे। हम अपने पारंपरिक रूप से घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहरा करने पर हुई चर्चाओं को महत्व देते हैं।

3. यह क्षण मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से 'डेजा वू' पल जैसा है। मुझे दिल्ली विश्वविद्यालय में एनएएम यूथ एक्सचेंज कार्यक्रम के लिए 80 के दशक के मध्य में अपने कॉलेज से युवा स्वयंसेवक के रूप में अपना समय याद आ रहा है।

4. हम एनएएम के लिए कई साझा लक्ष्यों की अवधि के दौरान मिल रहे हैं। गत वर्ष, हमने बांडुंग सम्मेलन के माध्यम से हमारे आंदोलन के संस्थापक सिद्धांतों को अपनाए जाने की 65वीं वर्षगांठ भी मनाई थी।

5. दशकों से, गुटनिरपेक्ष आंदोलन के इन मूल सिद्धांतों ने औपनिवेशीकरण को समाप्त करने की प्रक्रिया के लिए संभावित और नैतिक प्रोत्साहन दिया है, जिससे आज इस कक्ष में उपस्थित अनेक प्रतिनिधि देशों को स्वतंत्रता प्राप्त हुई है। इससे न्याय और शांति की एक अंतरराष्ट्रीय संस्कृति सामने आई है, और इसने आपसी हित, एकजुटता और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।

6. हालाँकि, जब हम पिछली उपलब्धियों पर विचार करते हैं, तो यह हमारे आंदोलन के बारे में ईमानदारी से आत्मनिरीक्षण करने का भी समय है - वैश्विक परिणामों पर एनएएम की निरंतर प्रासंगिकता और प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए हमें क्या करना चाहिए?

7. चाहे वह 2030 के विकास संबंधी लक्ष्यों को प्राप्त करना हो, आतंक के संकट का मुकाबला करना हो, जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करना हो अथवा महामारी को हराना हो - ये सभी ऐसे मुद्दे हैं जो हमारी व्यक्तिगत क्षमताओं से परे हैं। जिस प्रकार कोविड- 19 महामारी ने दुनिया भर में कहर बरपाया है इससे समकालीन समय की शायद सबसे बड़ी चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना करने में बहुपक्षीय तंत्र की अपर्याप्तता प्रकट हुई है। अपनी विविधता, साझा विकास आधारित अनुभव, और युवा तथा जीवंत जनसंख्या के साथ एनएएम में नेतृत्व करने और विश्व के लिए कल्याणकारी शक्ति बनने की क्षमता है।

8. अपनी ओर से, हम व्यवधानों के बजाय समाधान का हिस्सा रहे हैं। भारत ने 93 देशों और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना सहित संयुक्त राष्ट्र की दो संस्थाओं को वैक्सीन की 70 मिलियन से अधिक खुराकों की आपूर्ति की है। वैक्सीन की 940 मिलियन खुराक देकर अपने देश के लोगोंक को टीका लगाने के कारण हमारी अपनी घरेलू जरूरतें कम हो रही हैं, इसलिए हम कॉविन के साथ-साथ एक आईटी प्लेटफॉर्म के रूप में कोविड-19 टीकों के क्षेत्र में अपने सहयोग का विस्तार करेंगे जिसे सभी के लिए अथवा कोई भी जो सहायता की मांग कर रहा, को उपलब्ध कराया गया है ।

9. हाल के दिनों में, जबकि एनएएम कुछ क्षेत्रों में प्रभावी रहा है जहाँ हमने अपने और विकासशील देशों के हितों की रक्षा के लिए एक स्वर में बात की है; हम कुछ अन्य क्षेत्रों में तेजी से अप्रभावी हो गए हैं, विशेष रूप से नई और उभरती चुनौतियों से निपटने में ।

10. यह प्रमुख रूप से कुछ एनएएम सदस्यों द्वारा जानबूझकर विभाजनकारी मुद्दों को उठाने अथवा द्विपक्षीय मुद्दे निपटान के लिए एनएएम के मंच का उपयोग करने की प्रवृत्तियों के कारण है, जिससे हमारे बीच विभाजन पैदा होता है। हमारे सामूहिक प्रयास को मजबूत करने की दिशा में काम करने के बजाय पक्षपातपूर्ण एजेंडे के इस प्रकार अनुसरण के परिणामस्वरूप ऐसे सदस्यों की संख्या बढ़ गई है जो स्वयं को एनएएम पदों से अलग कर रहे हैं।

11. एक अन्य स्तर पर, हम स्वयं को गुटों में विभाजित कर रहे हैं, जो गुटनिरपेक्ष आंदोलन के बाहर भू-राजनीतिक विभाजन को दर्शाते हैं, न कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्वयं गुट को स्वतंत्र स्तंभ और प्रभावशाली आवाज बनने के लिए मजबूत करते हैं। एनएएम को विकासशील देशों के सामूहिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए बनाया गया था। यह हमारी शक्ति रही है, लेकिन यदि हम अपने आंदोलन के भीतर विभाजनकारी प्रवृत्तियों की जांच नहीं करेंगे तो हम अप्रासंगिक होने का जोखिम उठा रहे हैं। हमें अपनी चर्चा और निर्णय लेने की पद्धति पर पुनर्विचार करने और उसे पुनर्जीवित करने की भी आवश्यकता है, मनमानी और गैर-मानदंड आधारित प्रक्रियाओं का पालन करने से हमें अच्छे परिणाम प्राप्त नहीं होंगे।

विशिष्टजनों,

12. चाहे हम अपने सामूहिक हितों और महामारी, आतंकवाद तथा जलवायु परिवर्तन जैसी नई वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए समझौता करने के लिए तैयार हों, अंततः यह निर्धारित करेंगे कि तेजी से चुनौतीपूर्ण विश्व में एनएएम प्रासंगिक है या नहीं।

13. अफगानिस्तान में हाल के दिनों के घटनाक्रमों के बाद, यह अत्यंत आवश्यक है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का दृष्टिकोण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2593 द्वारा निर्देशित हो, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भारत की अगस्त की अध्यक्षता के अंतर्गत अपनाया गया था। इसने स्पष्टत: पुष्टि की है कि अफगानिस्तान की भूमि का उपयोग किसी भी देश के खिलाफ आतंकवादी हमले करने के लिए नहीं किया जा सकता है और न ही किया जाना चाहिए।

14. हमारे संस्थापकों ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की परिकल्पना विकासशील देशों के लिए भू-राजनीतिक परिदृश्य पर स्वायत्त स्थान बनाने के लिए की थी। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हम उस उद्देश्य के लिए प्रतिबद्ध रहें ताकि हम वास्तव में सामाजिक-आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी विकास की अपने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा कर सकें।

अध्यक्ष महोदय को मेरा धन्यवाद।

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