लोक राजनय

छठीं ब्रिक्‍स शिखर बैठक में एजेंडा – ''राजनीतिक समन्‍वय : अंतर्राष्‍ट्रीय अभिशासन एवं क्षेत्रीय संकट’’ पर प्रधान मंत्री का वक्‍तव्‍य

जुलाई 15, 2014

महामहिम,

हमारी बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विश्‍व उच्‍च स्‍तर के उथल-पुथल एवं अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक आर्थिक कमजोरी का दौर भी जारी है।

इसलिए शांति एवं स्थिरता का माहौल बहाल करना वैश्विक प्रगति एवं समृद्धि के लिए तात्‍कालिक आवश्‍यकता है।

मैं ऐसी धरती से आया हूँ जहां वसुधैव कुटुम्‍बकम की धारणा हमारे लोकाचार में है।

वैश्विक चुनौतियों का निर्णायक रूप से सामना करने के लिए विश्‍व को एकजुट होना चाहिए।

वैश्विक अभिशासन की संस्‍थाओं के सुधार के साथ सुधारात्‍मक कार्रवाई की शुरूआत होनी चाहिए। जब से ब्रिक्‍स की शुरूआत हुई है तब से यह इसके एजेंडा में है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद एवं अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्‍थाओं में सुधार की तत्‍काल आवश्‍यकता है। उनका अधिक प्रतिनिधिमूलक होना बहुत जरूरी है तथा उनमें जमीनी सच्‍चाइयां परिलक्षित होनी चाहिए। महामहिम, अफगानिस्‍तान से अफ्रीका तक जो क्षेत्र फैला है वह उथल-पुथल एवं संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। इसकी वजह से गंभीर अस्थिरता उत्‍पन्‍न हो रही है जो सीमाओं से बाहर तेजी से फैल रही है। इससे हम सभी प्रभावित होते हैं। इस ढंग से मूक दर्शक के रूप में देशों का बने रहना गंभीर परिणाम उत्‍पन्‍न कर सकता है।

अफगानिसतान अनिश्चित भविष्‍य के दौर से गुजर रहा है। अफगानिस्‍तान के लोग दशकों से कष्‍ट सह रहे हैं। शांतिपूर्ण, स्थिर, लोकतांत्रिक एवं खुशहाल देश का निर्माण करने में विश्‍व को उनकी सहायता करने के लिए एकजुट होना चाहिए।

हमें आंतकवाद की ताकतों से लड़ने में अफगानिस्‍तान की मदद करनी चाहिए। यह इसलिए महत्‍वपूर्ण है कि इसने पिछले दशक में जो प्रगति की है वह बनी रहे। भारत अभिशासन, सुरक्षा एवं आर्थिक विकास में इसकी क्षमता का निर्माण करने में अफगानिस्‍तान की मदद करना जारी रखेगा। हम इस संबंध में अपने ब्रिक्‍स साझेदारों के साथ मिलकर काम करने की कामना करते हैं।

पश्चिम एशिया में जो स्थिति है वह क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। भारत विशेष रूप से चिंतित है क्‍योंकि इससे 7 मिलियन भारतीय नागरिकों का जीवन प्रभावित हो रहा है जो खाड़ी क्षेत्र में रह रहे हैं। हमें पता लगाना चाहिए कि कैसे ब्रिक्‍स के सदस्‍य देश इराक में संघर्ष की समाप्ति में मदद करने के लिए साथ मिलकर काम कर सकते हैं।

सीरिया की घटनाएं लगातार चिंता का कारण बनी हुई हैं। भारत ने निरंतर सभी पक्षों से हिंसा छोड़ने का आह्वान किया है। व्‍यापक समाधान के लिए समावेशी राजनीतिक वार्ता का कोई विकल्‍प नहीं है। सैन्‍य या बाहर से थोपा गया समाधान काम नहीं करेगा। भारत किसी शांति प्रक्रिया में भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इजरायल एवं फिलीस्‍तीन में हाल ही में जो हिंसा भड़की है उससे भी भारत चिंतित है। हम वार्ता पर आधारित समाधान का समर्थन करते हैं। इससे पूरे विश्‍व में उम्‍मीद एवं विश्‍वास की भावना जगेगी।

भारत सुरक्षा एवं विकास की चुनौतियों से जूझ रहे अफ्रीका के अनेक देशों में स्थिति को स्थिर करने के लिए चल रहे प्रयासों का भी समर्थन करता है।

महामहिम, आतंकवाद ऐसा खतरा है जिसने युद्ध जैसी स्थिति ग्रहण कर ली है। वास्‍तव में यह एक छद्म युद्ध है जिसका उद्देश्‍य निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना है। भिन्‍न-भिन्‍न मानदंडों की वजह से अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय आतंकवाद से कारगर ढंग से लड़ने में समर्थ नहीं है।

मेरा यह दृढ़ विश्‍वास है कि आतंकवाद, इसका रूप या आकार जो भी हो, मानवता के खिलाफ है। आतंकवाद के प्रति शून्‍य सह्यता होनी चाहिए। मानवता को एकजुट होना चाहिए तथा आतंकी ताकतों को अलग-थलग करना चाहिए, विशेष रूप से ऐसे राज्‍यों को जो बुनियादी मानदडों का उल्‍लंघन करते हैं। आतंकवाद को वरणात्‍मक रूप से निशाना बनाना काम नहीं करेगा।

ब्रिक्‍स को चाहिए कि वह हमारे राजनीतिक संकल्‍प को ठोस एवं समन्वित कार्य योजना में रूपांतरित करे। मैं आह्वान करता हूँ कि संयुक्‍त राष्‍ट्र जल्‍दी से अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद पर प्रारूप व्‍यापक अभिसमय अपनाए।

हमें इस बात के लिए भी राज्‍यों पर सामूहिक रूप से दबाव डालना चाहिए कि वे आतंकवादियों को पनाह एवं समर्थन न दे।

इसी तरह, साइबर स्‍पेस महान अवसर का एक स्‍वरूप है परंतु साइबर स्‍पेस चिंता का एक प्रमुख कारण बन गया है। ब्रिक्‍स देशों को वैश्विक हित को ध्‍यान मे रखते हुए साइबर स्‍पेस के परिरक्षण में अ‍ग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। मुझे बड़ी प्रसन्‍नता है कि हम अपने राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के माध्‍यम से इस पर सहयोग कर रहे हैं।

अंत में, मैं यह कहना चाहूँगा कि इस अनोखे समूह में वैश्विक शांति एवं स्थिरता को आगे बढ़ाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता है।

हमें इस दिशा में केंद्रित ढंग से आगे बढ़ना चाहिए।

धन्‍यवाद।



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