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सरकारी प्रवक्ता द्वारा साप्ताहिक मीडिया वार्ता का प्रतिलेख (अगस्त 12, 2022)

अगस्त 12, 2022

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: आप सभी को नमस्कार । इस साप्ताहिक मीडिया वार्ता में हमसे जुड़ने के लिए धन्यवाद। शुरुआत करने के लिए मेरे पास कोई बड़ी घोषणा नहीं है। इसलिए, मैं विभिन्न मुद्दों पर प्रश्नों को आमंत्रित करता हूँ ।

सिद्धांत: महोदय, विऑन से सिद्धांत। मेरा प्रश्‍न यह है कि ताइवान स्ट्रेट में जो हो रहा है उस पर भारत की प्रतिक्रिया क्‍या है? हमने वहाँ चीन द्वारा सैन्य अभ्यास को देखा, जिसे एक आक्रामक कार्रवाई के रूप में देखा जाता है, जिसे भारत ने भी 2020 में देखा था।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: इससे संबंधित कोई प्रश्न किसी और के पास भी है? ताकि हम इसे एक ही राउंड में ले लें। ठीक है, ताइवान पर।

वक्ता 1: मैं हूँ (अश्रव्य)। मैं ताइवान से रिपोर्टर हूँ। मैं दिल्ली में रहता हूँ। ताइवान में करीब 5,000 से 10,000 भारतीय हैं। यदि स्थिति और खराब होती है तो क्या आपकी सरकार की उन्हें वापस लाने की कोई योजना है?

रेज़ौल: मैं हिंदुस्तान टाइम्स से रेज़ौल हूँ। उत्तरी सीमाओं पर यथास्थिति को बदलने के चीन के प्रयासों के बारे में भारत की कथित चिंताओं को देखते हुए, हम इसे कैसे देखते हैं, ताइवान के नेतृत्व की टिप्पणियों में कहा गया है कि चीन की कार्रवाई उस क्षेत्र में यथास्थिति को बदलने के प्रयास हैं और उनकी महत्वाकांक्षाएं उस क्षेत्र से बहुत आगे तक की हैं ।

वक्ता 2: मैं (अश्रव्य) सिन्हुआ समाचार एजेंसी से हूँ। नमस्कार। यूएस हाउस की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने हाल ही में चीन के ताइवान क्षेत्र का दौरा किया है। तो 170 से अधिक देशों ने एक चीन सिद्धांत के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। और भारत ने अभी तक कोई घोषणा नहीं की है। तो एक चीन सिद्धांत पर भारत की स्थिति क्या है? और नैन्सी पेलोसी की यात्रा पर आपकी क्या टिप्पणी है?

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्‍ता : तो मैं इस दौर के प्रश्‍नों को लेता हूँ। मुझे लगता है कि यह ठीक होगा । देखिए, इस मुद्दे पर कई अन्य देशों की तरह, भारत भी हाल के घटनाक्रमों से चिंतित है। हम संयम बरतने, यथास्थिति को बदलने के लिए एकतरफा कार्रवाई से बचने, तनाव कम करने और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों का आग्रह करते हैं। भारत की प्रासंगिक नीतियाँ सर्वविदित और सुसंगत हैं। उन्हें पुनरावृत्ति की आवश्यकता नहीं है। मैं इसे हिंदी में कह देता हूँ क्योंकि मुझे पता है कि आप में से कुछ पहले से ही हिंदी में पूछ रहे हैं।

कई अन्य देशो की तरह भारत भी हाल के घटनाक्रमों से चिंतित है, हम संयम बरतने और स्टेटस क्वो को बदलने के लिए युनीलेटरल एक्शन से बचने,तनाव कम करने और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों का अनुरोध करते हैं। भारत की प्रासंगिक नीतियाँ वेल नोन हैं और कंसिस्टेंट हैं, सर्वविदित हैं, सुसंगत हैं, उन्हें पुनरावृत्ति की आवश्यकता नही है।

मुझे लगता है कि आपके द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों के उत्तर में मैं यही कहना चाहूँगा। आगे बढ़ते हैं, क्या किसी और विषय पर प्रश्न हैं ?

अभिषेक: महोदय, सीएनएन न्यूज18 से अभिषेक। महोदय, मेरा प्रश्न जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों में से एक पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीनी पक्ष द्वारा नवीनतम तकनीकी रोक लगाने के संबंध में है। उनके प्रति भारत की क्या प्रतिक्रिया है?

कविता: सर मैं यह पूछना चाहती हूँ कि क्या पहली बार ऐसा हो रहा है इतिहास में कि भारत की सरकार ने कनाडा की सरकार को ये रिक्वेस्ट की है कि हमारे मिशन को सिक्योरिटी दी जाए 15th अगस्त को इंडिपेंडेंस डे सेलिब्रेशंस को मनाने के लिए?

येशी: नमस्कार, मैं द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से येशी सेली हूँ। नेपाल के विदेश मंत्री हाल ही में चीन में थे और उन्होंने वांग यी से मुलाकात की और यह पता चला है कि वांग यी ने कहा कि वे नेपाल में बुनियादी ढाँचे के विकास में करीब 15 अरब डॉलर का निवेश करने को तैयार हैं। क्या यह भारत के लिए चिंता का एक कारण या विषय है?

ऋषभ: नमस्कार महोदय, मैं सीएनएन इंटरनेशनल से ऋषभ हूँ । महोदय, हाल ही में हंबनतोता बंदरगाह पर एक चीनी पोत को लेकर विवाद हुआ था, जिसके लिए चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत के दबाव के कारण श्रीलंका ने रोक दिया है। उस पर भारत का क्या कहना है?

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: क्या आप अपना प्रश्न दोबारा दोहरा सकते हैं, मुझे पता है कि आप क्या कह रहे हैं, लेकिन मैं ठीक-ठीक जानना चाहता हूँ कि आप क्या पूछ रहे हैं।

ऋषभ: श्रीलंकाई समुद्र में एक चीनी पोत है, जिसे 11 से 17 तारीख तक हंबनतोता में डॉक किया जाना था। इसे डॉक नहीं किया गया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह श्रीलंका पर भारत के दबाव के कारण हुआ है। और महोदय इसी से संबंधित प्रश्न, भारत और अमेरिका एलएसी के पास एक संयुक्त अभ्यास कर रहे हैं और चीन ने फिर से कहा है कि यह भारत और चीन के बीच 1996 के आपसी समझौते के खिलाफ होगा। तो उस पर भारत का क्या रुख है?

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: अभिषेक आप ने तकनीकी रोक के बारे में पूछा था। यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में है। देखिए, मैं समझता हूँ कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर हमारे स्‍थायी प्रतिनिधि ने कुछ ही समय पहले एक वक्‍तव्‍य दिया था। यह रोक लगाने से पहले की बात है। मैं केवल इस बात पर जोर देता हूँ कि हम खेद के साथ नोट करते हैं कि अब्दुल रऊफ असगर, मुझे लगता है कि यही नाम है, के लिए लिस्टिंग प्रस्ताव पर एक तकनीकी रोक लगाई गई है। मैं इस बात पर जोर देना चाहता था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब आतंकवाद के खिलाफ हमारी सामूहिक लड़ाई की बात आती है, तो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय एक स्वर में बोलने में असमर्थ रहा है। जैसा कि मैंने उल्लेख किया है, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में हमारे स्थायी प्रतिनिधि ने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस के दौरान, 9 अगस्त को, इस चिंता को सभी सदस्यों के लिए स्पष्ट रूप से व्यक्त किया था और मेरे पास वह है, और मैं उद्धृत करता हूँ, "आतंकवादियों से निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। बिना कोई औचित्य बताए रोक और बाधा लगाने की प्रथा समाप्त होनी चाहिए। यह सबसे खेदजनक है कि दुनिया के कुछ सबसे कुख्यात आतंकवादियों से संबंधित वास्तविक और साक्ष्य आधारित लिस्टिंग प्रस्तावों को होल्ड पर रखा गया है। दोहरे मानकों और निरंतर राजनीतिकरण ने प्रतिबंध व्यवस्था की विश्वसनीयता को अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँचा दिया है।”

जैसा कि आप सभी जानते हैं, जैश ए मोहम्मद, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित संगठन है, का उप प्रमुख अब्दुल रऊफ असगर 1998 में इंडियन एयरलाइंस आईसी 814 के अपहरण, साथ ही 2001 में भारतीय संसद पर आतंकी हमले, और 2014 में कठुआ में भारतीय सेना के शिविर पर आतंकी हमले, साथ ही 2016 में पठानकोट आईएएफ बेस हमले जैसे आतंकवादी हमलों में सक्रिय रूप से शामिल था। उस पर पहले से ही भारतीय और अमेरिकी दोनों कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाया जा चुका है। और इसलिए, इस तरह के वांछित आतंकवादी के खिलाफ इस तकनीकी रोक को रखना सबसे अनुचित है। भारत इन आतंकवादियों को न्याय के कटघरे में लाने के अपने सैद्धांतिक रुख को जारी रखेगा, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के माध्यम द्वारा भी शामिल है। मुझे लगता है कि कनाडा पर एक प्रश्न था।

मुझे आपका सवाल ठीक से समझ नही आया। देखिए, हमारे ही दूतावास जो विदेश में है उनकी सिक्योरिटी वगेराह या हम कोई स्पेशल इवेंट करते है जैसे 15 अगस्त, 26 जनवरी या फिर कोई भी अदर इवेंट में, पब्लिक की कैसी सुरक्षा रहे या लोग आए उनकी सुरक्षा के लिए हम हमेशा लोकल गवर्मेंट, लोकल पुलिस अथॉरिटीज़ को हम रिक्वेस्ट करते है कि सिक्योरिटी दें। ये तो स्टैण्डर्ड है, कनाडा का स्पेसिफिक मुझे मालूम नही है हमने उधर भी किया होगा हमारे हाई कमीशन ने या हमारे कांसुलेट्स ने। ये कॉमन प्रैक्टिस है और सिक्योरिटी हम हमेशा मानते है कि होस्ट गवर्मेंट प्रोवाइड करें और हम उनसे कांटेक्ट में रहते है ताकि कोई भी ऐसी पब्लिक इवेंट या अदरवाइज आल्सो नार्मल में हमारे कार्यक्रम में सुरक्षा बनी रहे हमारी, दूतावासो में हमारे जो, वहां पे काम कर रहे सारे एम्बेसी ऑफिसर्स के लिए भी।

ऋषभ आपका प्रश्न इस पोत के संबंध में था। हमने कुछ टिप्पणियाँ देखी हैं। मुझे सुनिश्चित नहीं था कि आप वास्तव में क्या पूछ रहे थे। आप जानना चाहते थे कि इसे उठाया गया या नहीं उठाया गया। देखिए इस सबमें शामिल हुए बिना, मैंने इसके बारे में सामान्य टिप्पणियाँ देखी हैं, कि भारत को ऐसा करना चाहिए या श्रीलंका पर दबाव डाला गया है। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूँ कि भारत के बारे में इस तरह के बयानों में आक्षेपों को हम खारिज करते हैं। श्रीलंका एक संप्रभु देश है और अपने स्वतंत्र निर्णय लेता है। जहाँ तक भारत-श्रीलंका संबंधों का सन्दर्भ है, आप जानते हैं कि हम, हमारी नेबरहुड फर्स्ट नीति में श्रीलंका की केंद्रीयता के बारे में बात कर रहे हैं । इस वर्ष ही, भारत ने श्रीलंका के लोगों के सामने आने वाली गंभीर आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए 3.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अभूतपूर्व सहयोग दिया है। भारत श्रीलंका के लोकतंत्र, स्थिरता और आर्थिक सुधार का भी पूरा समर्थन करता है। और हमारी सुरक्षा चिंताओं के संबंध में, कुछ टिप्पणियाँ थीं। देखिए, यह हर देश का संप्रभु अधिकार है। हम अपने हित में सर्वोत्तम निर्णय लेंगे। इसमें स्वाभाविक रूप से क्षेत्र में मौजूदा स्थिति को, विशेष रूप से हमारे सीमावर्ती क्षेत्रों को ध्यान में रखा जाता है। और जहाँ तक भारत और चीन के संदर्भ में आपने पूछा था, हमने आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित की आवश्यकता को संबंधों के विकास के आधार के रूप में लगातार बनाए रखा है। मुझे लगता है कि मैं इसे यहीं ख़त्म करता हूँ ।

येशी आपका प्रश्न नेपाल के विदेश मंत्री की यात्रा पर था। देखिए, मैं देशों या तीसरे देशों पर टिप्पणी नहीं करूँगा। स्पष्ट रूप से नेपाल के साथ हमारे संबंध अद्वितीय हैं, और मुझे उस पर प्रकाश डालने की आवश्यकता नहीं है, वे अपनी योग्यता के आधार पर खड़े हैं। और किस पर चर्चा की गई है या क्या निवेश हो सकता है, उस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूँगा। मुझे लगता है, भारत-नेपाल संबंधों में, विशेष रूप से हमारे आर्थिक और संपर्क और हमारे लोगों से लोगों के संबंध बहुत खास हैं। और जैसा कि आपने हाल की दोनों पक्षों की उच्च स्तरीय यात्राओं से देखा, वास्तव में इस वर्ष, उस तरह के मजबूत संबंधों का एक अच्छा उदाहरण है जिसे हम मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। बेशक, अगर कोई गतिविधि है जो रक्षा या सुरक्षा पहलुओं को प्रभावित करती है, तो सरकार हमेशा उस पर संज्ञान लेती है, उस पर नजर रखती है और उसके खिलाफ आवश्यक उपाय करती है। ठीक है, कोई और प्रश्न?

कादम्बिनी शर्मा : कादम्बिनी शर्मा फ्रॉम एनडीटीवी इंडिया, न्यूयॉर्क में एक भारतीय मंदीप कौर की ख़ुदकुशी से मौत हुई है, उनके परिवार का कहना है कि जल्द से जल्द उनके शव को यहाँ लाया जाए। तो, उसमें भारतीय कांसुलेट या MEA क्या कर रहा है और दूसरी चीज़ क्या किसी प्रकार के जो परपेट्रेटर हैं उनके हसबैंड क्या उनके खिलाफ कोई क्रिमिनल एक्शन के लिए भी मदद कर रहा है?

पौलोमी: पौलोमी इंडिया टुडे की ओर से। मेरा सवाल है कि इन बैठकों के बारे में ऐसी खबरें आई हैं कि भारत ने 2019 और 2020 में रायसीना डायलॉग के दौरान नाटो के साथ राजनीतिक बातचीत की है। भारत नाटो के साथ कैसे जुड़ रहा है?

इलियाना: मैं रूसी समाचार एजेंसी टीएएसएस से इलियाना हूँ। और मेरा प्रश्‍न भारत को रूसी तेल की आपूर्ति पर है। मैं मान सकता हूँ कि आप कह सकते हैं कि यह प्रश्न तेल मंत्रालय से है। लेकिन अब मुझे लगता है कि यह पहले से ही राजनयिक क्षेत्र का सवाल है। इसलिए जैसा कि हम जानते हैं कि जी7 देश 5 दिसंबर तक रूसी तेल पर इस मूल्य सीमा तंत्र को लागू करने का लक्ष्य रखते हैं। तो मेरा प्रश्‍न यह है कि क्‍या आप इस मुद्दे पर मूल्य सीमा तंत्र पर पश्चिमी देशों के अपने सहयोगियों से बातचीत के दौरान पश्चिमी देशों से किसी प्रकार का दबाव महसूस करते हैं? और क्या आप उम्मीद करते हैं कि अगर यह दबाव वास्तव में मौजूद है तो 5 दिसंबर तक बढ़ सकता है? शुक्रिया।

साहिल: महोदय, मैं एएनआई से साहिल हूँ। महोदय, ऐसी खबरें आ रही हैं कि प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मिल सकते हैं। उस पर आपका क्या विचार है महोदय?

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्‍ता : हम इस दौर के प्रश्‍नों पर विचार करेंगे। मुझे लगता है कि पहला मामला उस आत्महत्या के बारे में था जो हुई है। कादम्बिनी जैसा कि हमने उसके बारे में बताया।ये बहुत दुःख की घटना है, ट्रैजिक सुसाइड मनदीप कौर जी इंडियन नेशनल न्यूयॉर्क रहती थीं। हमारी जो कांसुलेट है न्यूयॉर्क में वो लोकल अथॉरिटी और पुलिस के साथ कांटेक्ट में है, इंडियन कम्युनिटी के साथ भी वो कांटेक्ट में है और फैमिली मेंबर्स जो है मनदीप कौर जी के, उनके साथ भी वो कांटेक्ट में है। हमारी एम्बेसी वाशिंगटन डीसी में जो है उन्होंने भी ये केस वहां के जो यूएस फ़ेडरल गवर्मेंट के जो अथॉरिटीज है उनके साथ भी कांटेक्ट में है, उनके साथ भी डिसकस कर रहे है और उन्होंने हमे आश्वासन दिया है यूएस अथॉरिटीज ने कि जो भी एप्रोप्रियेट एक्शन उनके लॉ के तहत है वो लिया जाएगा। हमारी एम्बेसी और हमारे कांसुलेट जो न्यूयॉर्क में, ये हमारे जो एफर्ट्स है उसको लगातार करते रहेंगे ताकि इसमें एक थौरो इन्वेस्टीगेशन हो ताकि पता चले कि क्या हुआ है इसमें और जो नेसेसरी सहायता है फैमिली मेंबर्स को वो भी देते रहेंगे वो क्लोज कांटेक्ट में है। इंडिया में जो फैमिली है और वहां पे भी जो हमारी एम्बेसी है वो संपर्क में है।

पौलोमी आपने नाटो के बारे में पूछा है ना? जैसा कि मैंने कहा कि आपने कुछ टिप्पणियाँ की हैं, मैं उस पर नहीं जा रहा हूँ । मैं इतना ही कहना चाहूँगा कि भारत और नाटो पिछले कुछ समय से विभिन्न स्तरों पर ब्रसेल्स में संपर्क में हैं। यह आपसी हित के वैश्विक मुद्दों पर विभिन्न हितधारकों के साथ हमारे संपर्कों का हिस्सा है।

साहिल, देखिए, आप बहुत अधिक अनुमान लगा रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि हमने अभी तक प्रधानमंत्री की यात्रा या किसी संभावित बैठक या अन्य चीजों की घोषणा की है जो वे उस समय कर रहे होंगे। ऐसे उच्च स्तरीय दौरों की घोषणा उचित समय पर की जाती है। और निश्चित रूप से मेरे पास इस समय आपके साथ साझा करने के लिए कुछ भी नहीं है। तेल के मुद्दे पर इलियाना, देखिए, मैं आपको तेल, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से पूछने के लिए नहीं भेजूँगा, मैं तकनीकी विवरण पर, यदि आप जानना चाहते हैं, या सटीक चर्चा पर ऐसा करूँगा। मैं दो बातों पर जोर देना चाहता हूँ जो हम कह रहे हैं, कोई नई बात नहीं है। तेल या उससे संबंधित अन्य चीजों की खरीद के संबंध में हम क्या करते हैं, इस पर हमारे निर्णय हमारी ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं द्वारा निर्देशित होंगे, हमारा परिप्रेक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा द्वारा निर्देशित होगा। इसलिए कि हम कहते रहे हैं और हम उसका पालन करना और उसका अनुसरण करना जारी रखेंगे। जहाँ तक कोई मूल्य सीमा प्रस्ताव है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैं जानता हूँ कि इसके बारे में आम तौर पर कुछ चर्चाएँ थीं। मैंने इस पर कुछ रिपोर्ट देखी है। लेकिन जैसा कि मैं समझता हूँ विदेश सचिव या विदेश मंत्री, एक अवसर पर स्वयं विदेश सचिव ने कहा था कि ऐसे मुद्दों पर किसी दबाव का कोई सवाल ही नहीं है। और मैं निश्चित रूप से इस विचार पर सहमत नहीं हो पाऊँगा कि ऐसे मुद्दों पर दबाव है। मूल्य सीमा के इस विशिष्ट तत्व पर, तकनीकी चर्चाएं हैं, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैं आपको पेट्रोलियम मंत्रालय के पास संदर्भित करूँगा। लेकिन जैसा कि मैंने कहा, मुझे ऐसे किसी विशेष प्रस्ताव या विशिष्ट प्रस्ताव की जानकारी नहीं है जो कम से कम विदेश मंत्रालय के पास है। इसलिए मैं दबाव बढ़ने या घटने आदि के बारे में अटकलें नहीं लगाना चाहूँगा। सृंजॉय आगे बढ़ें।

सृंजॉय: महोदय, हम्बनतोता में इस चीनी पोत के बारे में हमेशा चर्चा होती रही है। साथ ही हम सुन रहे हैं कि शायद 15 अगस्त को भारत सरकार श्रीलंका को एक डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान सौंपेगी। मुझे बताया गया है कि विदेश मंत्रालय भी इसमें शामिल है। तो कृपया, क्या आप हमें इसके बारे में कुछ बता सकते हैं ।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: क्षमा करें, यह पहले वाले से कैसे जुड़ा है? इसका पहला भाग एक जहाज से संबंधित था जो आपने कहा था?

सृंजॉय: हाँ।

संध्या: महोदय, संध्या। महोदय, ताइवान के साथ एफटीए के बारे में त्वरित प्रश्न, कोई अपडेट जो आप साझा करना चाहेंगे? धन्यवाद।

शाहिद सिद्दीकी : महोदय, सद्भावना टुडे से शाहिद सिद्दीकी। क्या 19वीं इंटरपोल महासभा की तारीख की घोषणा कर दी गई है?

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: सृंजॉय, जैसा कि मैंने आपको चीनी पोत पर अपनी स्थिति और उस पर रिपोर्ट के बारे में बताया। मेरे पास 15 अगस्त या डोर्नियर या अन्य किसी भी प्रस्ताव पर साझा करने के लिए कुछ भी नहीं है। अगर ऐसा कुछ होता है, तो हम आपको बताएँगे।

ताइवान पर एफटीए पर, अफ़सोस की बात है, नहीं, मेरे पास कोई अपडेट नहीं है, संध्या । जैसा कि आप जानते हैं, हम कई भागीदारों के साथ एफटीए पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं, जिसमें कि आपने अभी-अभी यूएई के साथ देखा है, यूके, ऑस्ट्रेलिया के साथ काम चल रहा है। अगर मेरे पास कोई अपडेट होता है, तो मैं इस पर आपके पास वापस आऊँगा।

इस मुद्दे पर शाहिद, हाँ, इसकी मेजबानी करने की हमारी बारी है, लेकिन मुझे पक्का नहीं है। मुझे लगता है कि हम कुछ तारीखों पर काम कर रहे हैं लेकिन जैसे ही इसे अंतिम रूप दिया जाता है, वास्तव में हम इस पर प्रमुख एजेंसी नहीं हैं और हमें इसकी जाँच करनी होगी। मुझे लगता है कि MHA एजेंसी होगी। मेरे पास अभी तारीखों की पुष्टि नहीं है। मुझे पता है कि कुछ तारीखों पर काम किया जा रहा है। लेकिन जैसे ही हमारे पास होगा, हम इसे सार्वजनिक रूप से साझा करने की स्थिति में होंगे, मैंने उसे नोट कर लिया है, हम उसके बारे में बताएँगे। ठीक है। इस वार्ता के लिए हमसे जुड़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। एक शानदार सप्ताहांत के साथ-साथ स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ भी उत्साह से मनाएँ। स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ।

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