यात्रायें यात्रायें

हनोई में जयपुर फुट आर्टिफिशियल लिम्ब फिटमेंट्स के प्रस्तुति समारोह में उपराष्ट्रपति का भाषण

मई 11, 2019

नमस्ते!
महामहिम क्वांग निन्ह प्रांत के स्थायी उपाध्यक्ष, उपराष्ट्रपति के सचिव श्री सुब्बाराव, विदेश मंत्रालय की सचिव (पूर्व) श्रीमती विजय ठाकुर सिंह, वियतनाम में भारतीय राजदूत श्री पार्वथानेनी हरीश, वियतनाम सरकार के विदेश मामलों, स्वास्थ्य, श्रम, युद्ध के अशक्त व्यक्ति और सामाजिक मामलों के विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य अधिकारीगण।

विशिष्ट अतिथिगण,
बहनों और भाइयों,

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में 'इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी' कार्यक्रम के तहत आयोजित जयपुर फुट आर्टिफिशियल लिम्ब फिटमेंट कैंप के उद्घाटन के मौके पर हनोई स्थित भारतीय दूतावास में आप सबके साथ होने से मुझे अपार ख़ुशी हो रही है।

भारतीय वैश्विक दृष्टिकोण के अनुसार, संपूर्ण विश्व एक विशाल परिवार है। 7वीं शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास लिखी गई प्राचीन भारतीय महाकाव्य रामायण की निम्नलिखित पंक्ति इस सार्वभौमिक दृष्टि को स्वयं में समेटती है।

"अयमनिजःपरोवेतिगणनालघुचेतसाम
उदारापुरुशानामातु वसुधैव कुटुम्बकम”


केवल संकीर्ण मानसिकता वाले ही लोगों को 'अपने' और 'दूसरों' के रूप में वर्गीकृत करते हैं। जिनके पास बड़ा दिल है, उनके लिए पूरी दुनिया एक बड़ा परिवार है। इस दृश्य का एक हिस्सा, जो पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की अवधारणा पर आधारित है, सहानुभूति, साझा करने, देखभाल करने, तथा साथी मनुष्यों की पीड़ा को कम करने पर केंद्रित है।

महात्मा गांधी का जीवन इस दृष्टिकोण और मूल्य प्रणाली की एक शानदार अभिव्यक्ति है। जैसा कि उन्होंने खुद कहा था, "खुद को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप खुद को दूसरों की सेवा में खो दें।"

सेवा और मानवतावाद की इस दृष्टि और महान विचारों को मूर्त रूप देने के लिए होने वाले काम ने विश्व के कई नेताओं को प्रेरित किया है।

यह वही दृष्टि है जो भगवान बुद्ध ने 2500 साल पहले दुनिया को दी थी। वह उदार दृष्टि 'इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी' की पहल के लिए स्प्रिंग बोर्ड प्रदान करती है। इसके लिए, भारत सरकार ने परिवर्तित भारत से बाहर महान वैज्ञानिक नवाचारों में से एक का चयन किया है और अब यह कई लोगों के जीवन को लगातार बदल रहा है, अर्थात् जयपुर फुट। यह एक पहल है जो अलग-अलग प्रकार के दिव्यांगों को स्वतंत्रता और गतिशीलता की भावना, गरिमा की भावना और जीवन को पूरी तरह से जीने की क्षमता प्रदान करता है। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, संक्षेप में, बीएमवीएसएस, कृत्रिम अंगों के फिटमेंट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा गैर-लाभकारी संगठन है।

उल्लेखनीय ये है कि वे इन सेवाओं को पूरी तरह से नि:शुल्क प्रदान करते हैं। प्रतिष्ठित जयपुर फुट अन्य सभी कृत्रिम अंगों की तुलना में हलके हैं और इसने हजारों लोगों के जीवन को बदल दिया है और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने तथा समुदाय का उत्पादक सदस्य बनने में मदद की है। हमारी सरकार और बीएमवीएसएस के बीच यह साझेदारी प्रेम की साझेदारी है। यह सेवा की साझेदारी है। यह करुणा की साझेदारी है। यह हमारी पीढ़ी के सबसे महान मानव महात्मा गांधी के जीवन को सम्मानित करने के लिए की गयी एक साझेदारी है।

ये महात्मा गांधी थे जिन्होंने कहा था

"मैं मानवता की सेवा के माध्यम से भगवान को देखने का प्रयास कर रहा हूं; क्योंकि मैं जानता हूं कि भगवान न तो स्वर्ग में हैं, न ही नीचे, बल्कि सभी में हैं।" यह जाति, पंथ, नस्ल या धर्म के किसी भी भेद के बिना संपूर्ण मानवता की सेवा की भावना है जिसे हम ‘इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी’ के अभियान में हासिल करना चाहते हैं। पिछले साल भारत सरकार ने फुथो और विन फुक प्रांतों में जयपुर फुट कैंप का आयोजन किया था, जिसमें सैकड़ों दिव्यांग लोगों को लाभ प्राप्त हुआ था। वियतनामी लाभार्थियों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया अभिभूत करने वाली थी। वर्तमान जयपुर फुट लिम्ब फिटमेंट कैंप का आयोजन वियतनाम के क्वानगनिन्ह और येन बाई के प्रांतों में किया जा रहा है। मैं क्वांगनिन्ह की पीपुल्स कमेटी, क्वांगनिन्ह के पुनर्वास अस्पताल के प्रयासों की सराहना करना चाहूंगा, जिन्होंने भगवान् महावीर विकलांग समिति (बीएमवीएसएस), मेसर्स हूँगी ज्वाइंट स्टॉक कंपनी और भारत के दूतावास के साथ मिलकर काम किया है ताकि इस शिविर को वास्तविक रूप दिया जा सके और लाभार्थियों को सिर उठा कर चलने तथा सम्मानजनक जीवन जीने में मदद की जा सके। मैं येन बाई प्रांत और मेसर्स आर.के.मार्बल वियतनाम कंपनी लिमिटेड के प्रांतीय अधिकारियों को अपनी शुभकामनाएं और प्रशंसा देना चाहता हूं, जहां कैंप का दूसरा चरण आयोजित होगा।

प्रिय बहनों और भाइयों

अनादिकाल से भारत का मूल दर्शन साझा करना और देखभाल करना रहा है। जब आप धन अर्जित करते हैं और सफलता का जश्न मनाते हैं, तो आपको हमेशा दूसरों की जरूरतों, विशेषकर वंचित वर्गों पर ध्यान देना चाहिए। दूसरों के लिए मददगार होना ही हमारे जीवन जीने का तरीका है। आज इस आयोजन का हिस्सा बनकर मैं प्रसन्न हूं और आशा करता हूं कि आने वाले वर्षों में इस तरह की कई और सहयोगी पहलें दोनों देशों द्वारा की जाएंगी। मैं इस कार्यक्रम के आयोजन में शामिल सभी अधिकारियों और संगठनों को बधाई देना चाहता हूं।

जय हिन्द!

हनोई
मई 11, 2019


टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code