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राष्ट्रपति की फिलीपींस और जापान की आगामी यात्रा पर सचिव (पूर्व) द्वारा मीडिया ब्रीफिंग का प्रतिलेख (16 अक्टूबर, 2019)

अक्तूबर 16, 2019

सरकारी प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : मित्रों नमस्कार। राष्ट्रपति जी की फिलीपींस और जापान की यात्रा पर इस विशेष ब्रीफिंग में आपका स्वागत है। यह यात्रा 17-23 अक्टूबर 2019 तक होगी। फिलीपींस के लिए यह एक राजकीय यात्रा है और माननीय राष्ट्रपति जी की जापान की यात्रा जापान के सम्राट के सिंहासन समारोह में भाग लेने के लिए है। मेरे साथ सचिव (पूर्व) हैं जो हमें यात्रा के विभिन्न कारकों के बारे में बताएंगे। वे आज यहाँ श्री नवीन श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया) के साथ आयी हैं। उनके साथ श्री मनीष, संयुक्त सचिव (दक्षिण) और श्री अजय कुमार सिंह, माननीय राष्ट्रपति के प्रेस सचिव भी हैं। सर्वप्रथम, हम सचिव (पूर्व) द्वारा प्रारंभिक टिप्पणी से शुरुआत करेंगे और फिर उसमे बाद हम प्रश्नों के उत्तर देंगे।

सचिव (पूर्व), श्रीमती विजय ठाकुर सिंह : नमस्कर, जैसाकि रवीश ने बताया है कि राष्ट्रपति जी और प्रथम महिला फिलीपींस की राजकीय यात्रा पर जा रहे हैं। फिलीपींस यात्रा 17 से 21 अक्तूबर, 2019 तक होगी और यह यात्रा फिलीपींस गणराज्य के राष्ट्रपति श्री रोड्रिगो डुरेटे के निमंत्रण पर है। इसके बाद राष्ट्रपति जी 21 से 23 अक्टूबर तक जापान की यात्रा करेंगे और वहां वे महामहिम सम्राट, नरूहीतो द्वारा 1 मई, 2019 को क्रिसैंथेमम सिंहासन पर आरूढ़ होने से संबंधित समारोहों में भाग लेंगे।

फिलीपींस की यह यात्रा उस वर्ष में हो रही है जबकि हम दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 साल के समारोह के आयोजन कर रहे है और इसका प्रयोजन फिलीपींस के साथ हमारे संबंधों को उच्च स्तर पर ले जाना है। प्रधानमंत्री ने नवंबर 2017 में मनीला का दौरा किया था और फिर राष्ट्रपति ड्यूरटे जनवरी 2018 में नई दिल्ली में आये थे जब हमने भारत-आसियान स्मारक शिखर सम्मेलन - संबंधों के 25 वर्ष का आयोजन किया था।

अब फिलीपींस आसियान क्षेत्र में भारत का एक प्रमुख भागीदार है। फिलीपींस के साथ हमारे संबंध मैत्रीपूर्ण रहे हैं। हमने मूल्यों को साझा किया है और हमारे बीच समानताएं हैं और आप बढ़ते हुए आर्थिक संबंधों को देख रहे हैं। आज व्यापार 2.3 अरब डॉलर तक पहुँच गया है और भारत ने पिछले साल फिलीपींस को लगभग 1.7 अरब डॉलर का निर्यात किया है। इसका अर्थ है कि पिछले दो वर्षों में हमारे दोनों देशों के बीच व्यापार में 17% की वृद्धि हुई है। फिलीपींस में भारतीय कंपनियां भी हैं और वे अनेक क्षेत्रों में हैं, चाहे वे वस्त्र, सूचना प्रौद्योगिकी, औषधि के क्षेत्र में हो अथवा अवसंरचना के क्षेत्र में हो और उनका निवेश लगभग 600 मिलियन डॉलर का है।

फिलीपींस ने भी यहाँ निवेश किया है और वे निवेश के अन्य अवसर भी तलाश कर रहे हैं, तो आप फिलीपींस द्वारा भारत में निवेश देखेंगे और राष्ट्रपति जी की यात्रा के उद्देश्यों में से एक हमारे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के महत्व को गति प्रदान करना है। और न केवल व्यापार में, बल्कि फिलीपींस में विभिन्न क्षेत्रों में हम सहयोग की तलाश कर रहे हैं और हम सहयोग कर भी रहे हैं। हम स्वास्थ्य में, कृषि में, नवीकरणीय ऊर्जा में और आतंकवाद-प्रतिकार में सहयोग कर रहे है।

यदि आप हमारे रक्षा सहयोग की और देखेगें जो चल रहा है और यह प्रतिनिधिमंडलों के दौरों, नौसेना पोतों द्वारा यात्राओं और प्रशिक्षण प्रदान करने में सहयोग को चिह्नित करता है। हमने फिलीपींस के सशस्त्र बलों को भारत में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित करने के लिए हर साल 30-40 स्लॉट निश्चित कर दिए हैं। और हमने 2017 में हस्ताक्षरित रक्षा, उद्योग और संभार तंत्र पर एक समझौता ज्ञापन पर सहमति भी की थी और इससे दोनों देशों को रक्षा, व्यापार और सहयोग में सहयोग के नए क्षेत्रों पर विचार करने का अवसर मिला है।

जहां तक राष्ट्रपति जी के मनीला कार्यक्रम का संबंध है, वे जोस रिजल के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करके अपनी राजकीय यात्रा शुरू करेंगे, जोस रिजल फिलीपींस के राष्ट्रीय नायक हैं। राष्ट्रपति जी को मलकाजांग पैलेस में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा और उसके बाद दोनों राष्ट्रपतियों के बीच परस्पर प्रतिनिधि मंडल स्तर की बातचीत शुरू होगी। राष्ट्रपति दुतेर्ते, राष्ट्रपति जी के सम्मान में राजकीय भोज का भी आयोजन करेंगे। फिलीपींस में विभिन्न भारतीय उद्योग मंडलों का एक बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल होगा, जैसाकि मैंने कहा कि आर्थिक भागीदारी रिश्ते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और वहाँ भारत-फिलीपींस व्यापार सम्मेलन के साथ-साथ चौथे आसियान-भारत व्यापार शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रपति जी इन आर्थिक सम्मेलनों के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। राष्ट्रपति जी मरीम कॉलेज में शांति शिक्षा केंद्र में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे। वे फिलीपींस में भारतीय समुदाय जिसकी संख्या लगभग 130 हजार है, के अलावा फिलीपींस के लोगों के एक वर्ग के साथ बातचीत करेंगे । फिलीपींस में लगभग 15 हजार भारतीय छात्र हैं। इसलिए राष्ट्रपति जी भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करेंगे जो उनके कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह फिलीपींस की अपनी यात्रा की अंतिम तारीख को होगा। इसके अलावा, वे जयपुर फुट के लाभार्थियों के साथ और भारत में गुर्दा प्रत्यारोपण उपचार के लिए भारत आए कुछ बच्चों के साथ भी बातचीत करेंगे। तो वे उन लोगों के साथ भी बातचीत करेंगे।

मनीला से राष्ट्रपति जी टोक्यो जा रहे हैं और सम्राट नरूहीतो के सिंहासन समारोह में भाग लेंगे। राष्ट्रपति जी की यात्रा मुख्यतः इस उद्देश्य से होगी और वे जापान सरकार द्वारा आयोजित समारोहों में भाग लेंगे जहां राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

राष्ट्रपति जी 21 अक्तूबर को टोक्यो पहुंचेंगे और उसी दोपहर को वे टोक्यो में एक बौद्ध मंदिर जाएंगे जहां वे एक बोधि वृक्ष का पौधा लगाएंगे।यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत और जापान के गहरे पारंपरिक और सभ्यता के बंधनों को चिह्नित करता है। और बौद्ध धर्म की साझा विरासत को भी रेखांकित करता है।

इस बौद्ध मंदिर की यात्रा के बाद राष्ट्रपति जी शिंतो माजी तीर्थ की यात्रा करने जाएंगे जो सम्राट मीजी और उनकी पत्नी महारानी सोकिन को समर्पित है और वे लगभग आधे घंटे तक वहां रहेंगे और यह जापान में उनके प्रवास का पहला दिन होगा।

अगले दो दिन अर्थात 22 और 23 अक्तूबर, दोनों दिन समारोह के लिए निर्धारित किए गए हैं। राष्ट्रपति जी 22 अक्तूबर को सिंहासन आरूढ़ समारोह में भाग लेंगे और बाद में उसी दिन अर्थात 22 अक्तूबर की शाम को सम्राट और महारानी द्वारा राष्ट्रों के प्रतिनिधिमंडलों के लिए आयोजित भोज में भाग लेंगे।

अगले दिन राष्ट्रपति जी प्रधानमंत्री आबे द्वारा आयोजित सरकारी भोज में भाग लेंगे जिसका आयोजन उन राष्ट्राध्यक्षों के लिए किया गया है जिन्होंने इस सिंहासन समारोह में भाग लिया है। जहां तक राष्ट्रपति जी के कार्यक्रमों का संबंध है, वे वहां भारतीय समुदाय के साथ भी बातचीत करेंगे जिसका आयोजन किया जा रहा हैं और जो उच्च स्तरीय यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा है। लेकिन, 23 अक्तूबर को वे काकेगावा शहर का दौरा और यात्रा करेंगे। कारेनून अब यह एक ऐसा स्थान है जिसमें बड़ी संख्या में जापानी कंपनियां हैं। यहाँ सूजी कार्पोरेशन का मुख्यालय है और यह टोक्यो से लगभग 230 किलोमीटर दूर है और राष्ट्रपति जी सुपरफास्ट ट्रेनों से वहां की यात्रा करेंगे। इसके बाद वे सिनो सोटो के शिलान्यास समारोह में भाग लेंगे, जो एक ऐसा स्थान है जिसे मंदिर के रूप में तैयार किया जाएगा, जहाँ ध्यान के लिए, योग के लिए स्थान होगा और यह भारतीय परंपरा और संस्कृति को उजागर करने का एक केंद्र होगा।

तो जापान में राष्ट्रपति जी का यह कार्यक्रम और सम्राट नरूहीतो के सिंहासन समारोह में भाग लेने से संबंधित समारोहों में उनकी भागीदारी के बारे में है जो जापान के साथ हमारे संबंधों के अत्यधिक महत्व का परिचायक है और यह उस देश के साथ एक ऐसा सम्बन्ध है जिसके साथ हमारी विशेष, कार्यनीतिक और वैश्विक भागीदारी है।

और राष्ट्रपति जी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच हो रही उच्च स्तरीय यात्राओं की पृष्ठभूमि में है। प्रधानमंत्री आबे और प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में सितंबर 2019 में व्लादिवोस्तोक में पूर्वी आर्थिक मंच के दौरान मुलाकात की है। विदेश मंत्री ने भी न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में जापान के विदेश मंत्री से मुलाकात की। भारत से जापान की राष्ट्रपति स्तर की पिछली यात्रा 1990 में हुई थी और उस समय पूर्व राष्ट्रपति, स्वर्गीय श्री वेंकटरामन थे, जिन्होंने सम्राट एमेरिटस अकिहोतो के सिंघासन पर विराजमान समारोह में भाग लिया था, जो पिछले साल ही पद से हट गए थे। अब मैं अपनी बात समाप्त करूँगा और अब हम प्रश्नो, यदि कोई हो, के उत्तर देंगे।

प्रश्न : महोदया, आतंकवाद का मुकाबला करने पर, कृपया आप इस आलोक में नई बातों के बारे में विस्तारपूर्वक बताएं कि फिलीपींस आतंकवाद के भयावह दौर से गुजरा है और वहां आईएसआईएस भी था। इसके अलावा जापान में, जैसाकि आप जानते हैं कि जापान विकास कार्य में भारत की सहायता कर रहा है, तो उसके बारे में थोड़ा और अधिक बताएं कि क्या कुछ नई बातचीत चल रही है और उच्च गति ट्रेनों के बारे में क्या बात की जा रही है ?

सरकारी प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार :
हम दो से तीन प्रश्नों का उत्तर देंगे।

प्रश्न : फिलीपींस में भारतीय कंपनियों का निवेश किन क्षेत्रों में किया जाता है?

प्रश्न : क्या राष्ट्रपति जी जापान के सम्राट को किसी भी समय जल्द ही भारत की यात्रा के लिए आमंत्रित करने की आशा कर रहे हैं?

सचिव (पूर्व), श्रीमती विजय ठाकुर सिंह : जहां तक फिलीपींस का संबंध है, आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए हमारे साथ एक संयुक्त कार्य दल है और उस समूह की पिछली बैठक 2017 में हुई थी और इसके अंतर्गत उन्होंने उत्पन्न होने वाले खतरों से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की। हम शहरी आतंकवाद का मुकाबला करने के साथ-साथ उनके साथ सूचना के आदान-प्रदान के मामले में विशिष्ट क्षेत्रों पर काम करने के संदर्भ में उनके साथ मिलकर काम करने पर विचार कर रहे हैं। वास्तव में हम इस बात पर विचार करेंगे कि नशीले पदार्थों के संबंध में उनके साथ कैसे सहयोग किया जाए क्योंकि मादक पदार्थों और आतंकवाद के बीच एक संबंध है।

इसलिए यह व्यापक ढांचा है जिसके अंतर्गत हम आतंकवाद का मुकाबला करने में उनके साथ सहयोग करेंगे और उनके साथ काम करेंगे और आप यह बिल्कुल सही कह रहे हैं कि आप जानते हैं कि उन्होंने आतंकवाद की कठिन परिस्थितियों का सामना किया है और उस समय जब मारावी शहर को तबाह कर दिया गया था तब भारत ने शहर के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 500,000 डॉलर दिए थे।

फिलीपींस पर दूसरा प्रश्न था कि किन क्षेत्रों में निवेश किया गया है। फिलीपींस में हम हवाई अड्डे के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। हमारी एक कंपनी है जो सेबू में हवाई अड्डों का काम कर रही है। वास्तव में फ़िलिपींस में सभी प्रमुख इतालवी और दवा कंपनियां और वस्त्र से संबंधित कंपनियां भी हैं। तो मुख्यतः वे व्यापक क्षेत्र हैं जिनमे फिलीपींस में भारतीय कंपनियों और भारतीय उद्योग विद्यमान है।

जहां तक जापान का संबंध है, निश्चित रूप से मैंने आपसे उल्लेख किया है कि राष्ट्रपति जी उच्च गति वाली रेल में यात्रा करेंगे और वे टोक्यो से कासगावा उच्च गति वाली रेल से जा रहे हैं। चूंकि आपको पता है कि यह एक महत्वपूर्ण यात्रा नहीं है, यह अधिक राज्याभिषेक समारोह में भाग लेने के लिए है और हम दोनों राजनेताओं के बीच वार्ता के दौरान जापान के साथ बातचीत जारी रखना चाहेंगे। आपको इस बात की जानकारी होगी कि जापान के साथ हमारी वार्षिक वार्ता चल रही है। इसलिए नए क्षेत्रों का पता लगाने और जिस बात पर सहमति हुई है उसे लागू करने के लिए जापान के साथ बातचीत जारी रहेगी। जहां तक निमंत्रण का संबंध है, मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति जी निमंत्रण देंगे, लेकिन निश्चित रूप से यह एक राष्ट्रपति जी का निर्णय होगा। मरावी सहायता 500,000 अमेरिकी डॉलर की थी।

प्रश्न : क्या राष्ट्रपति जी की रेनक-जी मंदिर जाने की कोई योजना है?

सचिव (पूर्व), श्रीमती विजय ठाकुर सिंह : मैं पहले ही कार्यक्रम की पूरी जानकारी दे चुकी हूं और राष्ट्रपति जी का जापान में यह कार्यक्रम है।

प्रश्न : सिंहासन समारोह में वहां क्या उपहार देने या क्या करने की योजना है, इसका विवरण दें ?

सचिव (पूर्व), श्रीमती विजय ठाकुर सिंह : मेरे पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह एक राज्याभिषेक समारोह है इसलिए राष्ट्रपति जी सिंहासन आरूढ़ समारोह में भाग लेने जा रहे हैं।

प्रश्न : महोदया, आपने उल्लेख किया है कि राष्ट्रपति जी सिनो सोतो के शिलान्यास समारोह में भाग लेंगे जो योग और ध्यान के लिए समर्पित एक स्थल है। योग प्रधानमंत्री के ह्रदय के बहुत करीब होने के नाते, मैं सोच रहा था कि क्या भारत ने इस मंदिर के विकास के लिए कोई जानकारी दी है?

संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया), श्री नवीन श्रीवास्तव :देखें यह मंदिर एक जापानी कंपनी द्वारा बनाया जा रहा है। इस मंदिर के लिए जनता का बहुत समर्थन है और भारतीय समुदाय ने भी इसमें योगदान दिया है। मुख्य संरक्षक में से एक विदेशी भारतीय है जो एक बहुत लंबे समय से जापान में रह रहा है। तो यह कैसे किया जा रहा है। यह सरकार से सरकार की परियोजना नहीं है, यह एक सार्वजनिक परियोजना है।

प्रश्न : …. अश्रव्य ………..

संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया), श्री नवीन श्रीवास्तव :हाँ, वह एक भारतीय मूल के व्यक्ति जो अब जापान के प्राकृतिक नागरिक है।

सरकारी प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : मुझे कोई और हाथ दिखाई नहीं दे रहा है। महोदय आपका धन्यवाद, संयुक्त सचिव महोदय आपका धन्यवाद और प्रेस सलाहकार महोदय आपका धन्यवाद और इसमें शामिल होने के लिए आप सभी का धन्यवाद।

(समापन)



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