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स्विटज़रलैंड में महात्मा गांधी की अर्ध-प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर राष्ट्रपति का संबोधन

सितम्बर 14, 2019

1. मैं आपके गर्मजोशी भरे पारंपरिक स्वागत के लिए धन्यवाद देता हूं। विलेन्यूवे में महात्मा गांधी की अर्ध-प्रतिमा का अनावरण कर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं। इस वर्ष हम हमारे राष्ट्रपिता की 150वीं जयंती मना रहे हैं। मैं विलेन्यूवे के समुदाय को धन्यवाद देता हूं कि हमें यहां उनकी विरासत को मनाने और उनके नाम पर इस स्क्वायर का नामकरण करने का अवसर मिला।

2. महात्मा गांधी के इस खूबसूरत शहर के साथ विशेष संबंध थे। उन्होंने 1931 में नोबल पुरस्कार विजेता रोमां रोलां के निमंत्रण पर विलेन्यूवे का दौरा किया था। निश्चित रूप से, वो एक अलग ही समय था। भारत अभी भी महात्मा के नेतृत्व में अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ रहा था। उनकी शिक्षाएँ, हालांकि, आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रत्येक वर्ष 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी के जन्मदिन को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है।

3. महात्मा गांधी का जीवन हमें कई बातें सिखाता है। उन्होंने साबरमती नदी के तट पर भारत में अपने पहले आश्रम का निर्माण किया। आज, हम उन्हें जिनेवा झील के किनारे ले आए हैं। आपने उन्हें विशेष स्थान दिया है, प्रकृति के करीब और अपने दिलों के करीब। यह प्रकृति से प्यार करने वाले और इसकी परवाह करने वाले व्यक्ति के लिए सबसे उपयुक्त श्रद्धांजलि है। उनकी विरासत हमें प्रेरित करेगी क्योंकि हम जलवायु परिवर्तन से निपटने और हमारी पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए मिलकर काम करते हैं।

4. महात्मा गांधी मानवता की एकता में विश्वास करते थे। उन्होंने सभी संस्कृतियों और सभी लोगों को गले से लगाया। वे हिंदू धार्मिक गीतों और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत को समान सहजता और समझ के साथ सुनते थे। विलेन्यूवे में, रोमां रोलां ने उनके लिए बीथोवेन को सुनाया। उन्होंने उस महान युद्ध पर लंबी बातचीत की थी जिसने यूरोप को तबाह कर दिया था और इस बात पर भी चर्चा की थी कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए शांति कैसे सुरक्षित हो सकती है। जैसा कि दोनों लोकतंत्र विविधता के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं, महात्मा गांधी सभी के लिए शांति और आनंद लाने की हमारी साझा यात्रा में हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।

5. गांधीवादी विचारों का आपके साथ एक और संबंध है। स्विस लोकतांत्रिक राजनीति में समुदायों की एक अलग सामाजिक और राजनीतिक भूमिका है। यह बहुत हद तक महात्मा गांधी द्वारा स्थापित ग्राम स्वराज या ग्राम गणराज्य की अवधारणा से मेल खाता है।

6. पिछले साल, हमने 1948 में हस्ताक्षरित भारत-स्विट्जरलैंड संधि की 70वीं वर्षगांठ मनाई। यह मैत्री की वो पहली संधि थी जिसपर भारत ने एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में हस्ताक्षर किया था। तब मित्रता का जो बीज हमने बोया था, वो आज आपसी विश्वास, सहयोग और समझ के एक फलप्रद वृक्ष के रूप में विकसित हो गया है।

7. मैं एक बार फिर विलेन्यूवे के समुदाय और उन सभी लोगों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने इस विशेष कार्यक्रम के आयोजन में योगदान दिया है।

धन्यवाद।

विलेन्यूवे
14 सितम्बर, 2019



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